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महेंद्रगढ़: निजामपुर-नांगल चौधरी में 49 गुमशुदगी के मामले, 44 बरामद, 5 अब भी लापता; ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
निजामपुर/नांगल चौधरी। थाना क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे गुमशुदगी के मामलों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ महीनों से क्षेत्र में लगभग हर सप्ताह लड़कियों और विवाहित महिलाओं के लापता होने की घटनाएं सामने आने से गांवों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कोई इन मामलों के पीछे प्रेम संबंधों को वजह बता रहा है, तो कोई पारिवारिक विवाद, आर्थिक तंगी, ऑनलाइन ठगी और यहां तक कि मानव तस्करी जैसी गंभीर आशंकाएं भी जताई जा रही है।
इसी बीच पुलिस ने दोनों थाना क्षेत्रों के गुमशुदगी मामलों के आंकड़े सार्वजनिक किए हैं। आंकड़ों के अनुसार कुल 49 मामलों में से 44 लोगों को पुलिस ने तलाश कर उनके परिजनों तक पहुंचा दिया है, जबकि पांच लोगों की तलाश अभी भी जारी है।
निजामपुर थाना प्रभारी धर्मसिंह ने बताया कि थाना क्षेत्र में 19 गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए, जिनमें से 17 लोगों को बरामद कर लिया गया है। शेष दो मामलों में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। उन्होंने कहा कि तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और स्थानीय स्तर पर जुटाई जा रही सूचनाओं के आधार पर जांच को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
वहीं नांगल चौधरी थाना प्रभारी पवन कुमार ने बताया कि उनके थाना क्षेत्र में 30 गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए, जिनमें से 27 लोगों को सुरक्षित ढूंढ निकाला गया है। तीन लापता व्यक्तियों की तलाश के लिए विशेष पुलिस टीमें विभिन्न संभावित ठिकानों पर जांच कर रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बाद युवाओं के संपर्क तेजी से बढ़े हैं। कई मामलों में परिवार को लंबे समय तक यह तक पता नहीं चल पाता कि बेटियां किन लोगों के संपर्क में थीं। यही कारण है कि क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल महसूस किया जा रहा है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के लापता होने पर तुरंत सूचना दें, क्योंकि शुरुआती घंटे जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। साथ ही अभिभावकों से बच्चों और परिवार के सदस्यों की गतिविधियों पर सतर्क नजर रखने, संवाद बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध जानकारी को तुरंत पुलिस तक पहुंचाने को कहा गया है।
लगातार बढ़ते मामलों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आखिर ग्रामीण अंचल में बेटियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर समाज, परिवार और प्रशासन को अब और कितनी गंभीरता से कदम उठाने होंगे।
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