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Mandi: उन्नत चारा उत्पादन से बढ़ेगी पशुपालकों की आय, 100 किसानों को बांटे बीज और कृषि उपकरण
Ankesh Dogra
Updated Tue, 11 Aug 2026 02:50 PM IST
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गुणवत्तापूर्ण चारा उत्पादन और वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंगलवार को मंडी के देवधार स्थित सत बाला कामेश्वर मंदिर परिसर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। मंथला पंचायत के अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े पशुपालक और किसान परिवारों के लिए आयोजित कार्यक्रम में 150 से अधिक किसानों ने भाग लिया। इस दौरान 100 चयनित पशुपालक किसानों को उन्नत चारा घास के बीज, रूट स्लिप्स और विभिन्न कृषि उपकरण वितरित किए गए।
कार्यक्रम का आयोजन आईसीएआर-भारतीय घास एवं चारा अनुसंधान संस्थान, झांसी के सेंटर फॉर इंडियन हिमालयन ग्रासलैंड, डायरेक्टरेट ऑफ कम्युनिटी सर्विसेज, करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय हमीरपुर और प्रो. अनुपमा सिंह की कल्पतरु फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत किया गया। कार्यक्रम को डॉ. आरके राजू की स्मृति को समर्पित किया गया।
आईसीएआर-आईजीएफआरआई के वैज्ञानिक प्रभारी डॉ. शीराज भट्ट, वैज्ञानिक सुरेंद्र पॉल और डॉ. गुलशन कुमार ने किसानों को उच्च प्रोटीन वाली चारा घास के महत्व और इसके वैज्ञानिक उत्पादन की जानकारी दी।
वैज्ञानिकों ने कहा कि पशुओं को संतुलित आहार उपलब्ध कराने के साथ उन्नत चारा प्रजातियों का उत्पादन और वैज्ञानिक पशुपालन तकनीक अपनाने से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर किया जा सकता है। इससे दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और पशुपालकों की आमदनी में भी इजाफा हो सकता है।
किसानों को चारा उत्पादन की विभिन्न तकनीकों, खेत में चारा घास की देखभाल और कृषि उपकरणों के उचित इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान मंथला पंचायत के 100 चयनित अनुसूचित जाति वर्ग के पशुपालक किसानों को सेटेरिया और पासपालम जैसी उच्च प्रोटीनयुक्त चारा घास के बीज और रूट स्लिप्स उपलब्ध करवाए गए। इसके अलावा फावड़े, कुदाल समेत अन्य कृषि उपकरण भी वितरित किए गए।
किसानों को बताया गया कि उन्नत किस्म की चारा घास का उत्पादन बढ़ाकर पशुओं के लिए सालभर पौष्टिक आहार की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। इससे बाजार से चारा खरीदने पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकता है।
कार्यक्रम में करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव शर्मा, ओएसडी ऋचा शर्मा, डॉ. गुलशन कुमार सहित विश्वविद्यालय और आईसीएआर-आईजीएफआरआई के प्रतिनिधि मौजूद रहे। मंथला पंचायत प्रधान प्रवीण, उपप्रधान महेश और सत बाला कामेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष मुकेश सहित समिति के अन्य सदस्य भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
प्रो. अनुपमा सिंह ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए किसानों को केवल आर्थिक सहायता देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें ज्ञान, आधुनिक तकनीक, संसाधनों और बाजार से जोड़ना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण चारा पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और अधिक दूध उत्पादन की बुनियाद है।
उन्होंने बताया कि कल्पतरु फाउंडेशन की ओर से आने वाले समय में भी ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, कृषि और आजीविका से जुड़े कार्यक्रम जारी रखे जाएंगे।
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