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Himachal Agriculture Alert: मंडी में मक्की की फसल पर फॉल आर्मीवॉर्म का हमला, कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को किया सतर्क
Ankesh Dogra
Updated Tue, 14 Jul 2026 01:47 PM IST
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हिमाचल प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान मक्की की फसल पर विदेशी कीट फॉल आर्मीवॉर्म (Fall Armyworm) का प्रकोप बढ़ गया है। मंडी जिले में इसकी स्थिति को गंभीर देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। वैज्ञानिकों ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखते ही नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है।
कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर के प्रभारी एवं वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. पंकज सूद ने बताया कि मंडी जिले में करीब 48 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मक्की की खेती होती है, जहां इस कीट का प्रभाव ज्यादा देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 2.85 लाख हेक्टेयर भूमि पर मक्की उगाई जाती है और पिछले कुछ वर्षों से यह विदेशी कीट किसानों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष मौसम की परिस्थितियां अनुकूल रहने के कारण हाइब्रिड मक्की की कई किस्मों पर फॉल आर्मीवॉर्म का हमला तेज हुआ है। समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार फॉल आर्मीवॉर्म मूल रूप से अमेरिका का कीट है, जो वर्ष 2018 में भारत पहुंचा था। अब यह मक्की के अलावा धान, गेहूं और ज्वार जैसी फसलों को भी प्रभावित कर रहा है। इसकी मादा एक बार में 100 से 200 अंडे देती है और गर्म मौसम में इसका जीवन चक्र करीब 30 से 35 दिन में पूरा हो जाता है। मक्की की एक फसल अवधि में यह कई पीढ़ियां तैयार कर सकता है, जिससे इसका प्रकोप तेजी से फैलता है।
डॉ. पंकज सूद ने बताया कि इस कीट का लार्वा मक्की की पत्तियों और तनों को नुकसान पहुंचाता है। बाद में यह भुट्टों के अंदर पहुंचकर फसल को कमजोर कर देता है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे समय-समय पर खेतों का निरीक्षण करें और कीट के लक्षण नजर आने पर तुरंत कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें। नियंत्रण के लिए क्लोरेंट्रानिलिप्रोल (कोराजन) 0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करने या इमामेक्टिन बेंजोएट का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रकोप नियंत्रित नहीं होता है तो 15 दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा वयस्क पतंगों को नियंत्रित करने के लिए खेतों में फनल ट्रैप लगाने की भी सलाह दी गई है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि समय पर कदम उठाकर मक्की की फसल को नुकसान से बचाएं।
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