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Natural Farming: मंडी में प्राकृतिक खेती ने पकड़ी रफ्तार, 48,380 किसान जुड़े; 8,400 हेक्टेयर में रसायनमुक्त खेती
Ankesh Dogra
Updated Sun, 09 Aug 2026 12:11 PM IST
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मंडी जिले में प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने और खेती की लागत कम करने वाली महत्वपूर्ण पहल के रूप में तेजी से आगे बढ़ रही है। जिले में अब तक 48,380 किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं, जबकि करीब 8,400 हेक्टेयर भूमि को रसायनमुक्त खेती के दायरे में लाया जा चुका है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के बाद किसानों का भरोसा भी बढ़ा है।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत जिले में रसायनमुक्त खेती को बढ़ावा देने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और किसानों की उत्पादन लागत कम करने पर जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में जिले में 2,500 हेक्टेयर क्षेत्र, 50 क्लस्टर और 8,214 किसानों को योजना से जोड़ा गया।
अब वर्ष 2026-27 में एक हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र, 20 नए क्लस्टर और 2,500 नए किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि विभाग के अनुसार पिछले दो वर्षों में न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत किसानों से 1040.81 क्विंटल मक्का, 644.24 क्विंटल गेहूं और करीब 233 क्विंटल हल्दी खरीदी गई है।
घांघल के किसान प्रताप सिंह के अनुसार गेहूं का समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़कर 80 रुपये और मक्की का 40 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो हुआ है। इससे प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
ढंडोल के किसान मस्तराम ने पांच बीघा भूमि में प्राकृतिक खेती से गेहूं और मक्की की पैदावार की। उन्होंने करीब 65 हजार रुपये का गेहूं और 25 हजार रुपये की मक्की सरकार को बेची।
मस्तराम के अनुसार हल्दी का समर्थन मूल्य भी 90 रुपये से बढ़कर 150 रुपये प्रति किलो हो गया है। इससे प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को अपनी उपज बेचने में बेहतर लाभ मिलने की उम्मीद है।
वर्ष 2026-27 के लिए करीब 4.93 करोड़ रुपये की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है। इसके तहत किसानों के प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और प्रमाणन के साथ 13 बायो रिसोर्स सेंटर स्थापित करने की योजना है।
किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन और अनुदान भी दिए जा रहे हैं। स्वदेशी गाय खरीदने पर किसानों को 25 हजार रुपये की सहायता भी दी जा रही है।
प्राकृतिक खेती के विस्तार के साथ जिले में रसायनमुक्त खेती का क्षेत्र बढ़ाने और अधिक किसानों को इससे जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
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