कारगिल युद्ध और बालकोट हमले में देश के दुश्मनों के हौसले पस्त करने वाला मिग-21 विमान 26 सितंबर से विदा होने वाला है। भारतीय सेना का शेर कहे जाने वाले इस विमान की विदाई चंडीगढ़ स्टेशन पर फ्लाईपास्ट के साथ होगी। अब यह विमान भारतीय सेना के बेड़े में शामिल नहीं रहेगा। शुक्रवार के बाद यह इतिहास में तब्दील हो जाएगा, लेकिन इससे जुड़े किस्से हमेशा जिंदा रहेंगे। 62 साल की सेवाएं देने के बाद मिग-21 अब ‘सेवानिवृत’ होने जा रहा है। अब मिग-21 की जगह स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान लेगा। जिससे वायुसेना को नई ताकत मिलेगी।
आपको बता दें कि रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ 62 हजार 370 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक सौदा किया है। इस समझौते के तहत भारतीय वायुसेना के लिए 97 तेजस लड़ाकू विमान खरीदे जाएंगे। यह सौदा भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने और वायुसेना को आधुनिक हथियारों से लैस करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह अनुबंध गुरुवार को साइन किया गया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 97 तेजस MK-1A विमानों के साथ संबंधित उपकरण भी खरीदे जाएंगे। इस सौदे में टैक्स शामिल नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट समिति ऑन सिक्योरिटी की बैठक में एक महीने पहले इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी।
इससे पहले फरवरी 2021 में रक्षा मंत्रालय ने HAL के साथ 48 हजार करोड़ रुपये का सौदा किया था। उस अनुबंध के तहत भारतीय वायुसेना को 83 तेजस AK-1A विमान मिलने हैं। अब नया सौदा उस श्रृंखला को आगे बढ़ाता है और भारत की एयरोस्पेस क्षमता में बड़ा इजाफा करता है। तेजस MK-1A विमानों में 'स्वयम् रक्षा कवच' और आधुनिक कंट्रोल एक्ट्यूएटर्स जैसे एडवांस फीचर होंगे। इनमें 64 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी पुर्जे होंगे और 67 नए स्वदेशी आइटम जोड़े गए हैं। तेजस एक मल्टी-रोल फाइटर विमान है, जो एयर डिफेंस, समुद्री निगरानी और स्ट्राइक मिशन में इस्तेमाल किया जा सकता है।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इन विमानों की डिलीवरी 2027-28 से शुरू होगी। यह सिंगल-इंजन जेट भारतीय वायुसेना के पुराने पड़ चुके मिग-21 विमानों की जगह लेगा। वायुसेना के पास वर्तमान में केवल 31 स्क्वाड्रन बचे हैं, जबकि अधिकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है। ऐसे में तेजस की एंट्री वायुसेना के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। इस सौदे को भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। तेजस न केवल वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा बल्कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी गति देगा। स्वदेशी टेक्नोलॉजी और नए डिजाइन के साथ बना यह विमान आने वाले वर्षों में भारत को इस्राइल, अमेरिका और अन्य शक्तिशाली देशों के बराबर खड़ा करने में मदद करेगा।
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