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Trump defends imposing 50% tariff on India, listen to what he said?
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भारत पर 50% टैरिफ लगाने का ट्रंप ने किया बचाव, सुनिए क्या बोले?
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Wed, 03 Sep 2025 08:57 AM IST
क्या अमेरिका और भारत के बीच रिश्तों की बुनियाद सिर्फ व्यापारिक संतुलन पर टिक गई है? क्या दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्रों के बीच खड़ा यह टैरिफ विवाद रिश्तों को गहरे संकट में धकेल सकता है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ का बचाव किया है और साफ कहा है कि यह कदम अमेरिका के हित में उठाया गया है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या इस विवाद से दोनों देशों के बीच दशकों से चली आ रही “स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” खतरे में पड़ जाएगी?
व्हाइट हाउस में प्रेसवार्ता के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे भारत पर लगाए गए टैरिफ को हटाने पर विचार करेंगे। इस पर उन्होंने दो टूक कहा – “नहीं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका और भारत के बीच रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन यह रिश्ता लंबे समय तक “एकतरफा” रहा।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि भारत ने हमेशा अमेरिकी उत्पादों पर अत्यधिक टैरिफ लगाया। उदाहरण के तौर पर उन्होंने हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिल का मुद्दा उठाया। ट्रंप ने कहा – “भारत में मोटरसाइकिल पर 200% टैरिफ था। हार्ले डेविडसन वहां अपना प्लांट लगाने के बाद ही टैरिफ से बच पाई। लेकिन यह न्यायसंगत व्यवस्था नहीं थी।”
ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिका से 100% तक का टैरिफ वसूलता रहा है। जबकि अमेरिका ने भारत के उत्पादों पर “मूर्खतापूर्ण तरीके से” शुल्क नहीं लगाया। नतीजा यह हुआ कि भारत का माल अमेरिकी बाजार में बाढ़ की तरह आया, लेकिन अमेरिकी कंपनियों को भारत में अपनी जगह बनाने में मुश्किलें आईं।
राष्ट्रपति का दावा है कि अब हालात बदल रहे हैं। उनकी सरकार द्वारा लगाए गए टैरिफ के चलते हजारों विदेशी कंपनियां अमेरिका में अपने प्लांट स्थापित कर रही हैं। उन्होंने कहा – “जब वे यहां प्रोडक्शन करेंगे तो उन्हें कोई टैरिफ नहीं देना होगा। यही हमारी जीत है।”
ट्रंप प्रशासन ने जुलाई 2025 में भारत पर 25% टैरिफ लगाया था। इसके बाद 27 अगस्त से भारतीय तेल आयात पर 25% सेकेंडरी टैरिफ और भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लागू कर दिया गया। इसका सीधा असर भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर पड़ा।
भारत ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया और कहा कि यह “अविश्वास का माहौल” बना रहा है। भारत की दलील है कि अमेरिकी टैरिफ का असर न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था भी प्रभावित होगी।
भारत से अमेरिका को बड़े पैमाने पर टेक्सटाइल, फार्मा, आईटी सर्विस, स्टील और एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स का निर्यात होता है। 50% टैरिफ लगने के बाद भारतीय कंपनियों की लागत अचानक बढ़ गई है। छोटे और मध्यम स्तर के निर्यातकों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।
टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स का कहना है कि इस फैसले के चलते अमेरिकी बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा घट जाएगी। वहीं, फार्मा सेक्टर भी चिंतित है क्योंकि अमेरिका भारतीय दवाओं का सबसे बड़ा बाजार है।
ट्रंप का तर्क है कि टैरिफ के चलते विदेशी कंपनियां अमेरिका में ही उत्पादन कर रही हैं। कई कार कंपनियां चीन, मेक्सिको और कनाडा से हटकर अमेरिका में अपने कारखाने लगाने की योजना बना रही हैं। ट्रंप इसे अपनी “आर्थिक जीत” बता रहे हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अल्पकालिक लाभ तो अमेरिका को मिलेगा, लेकिन लंबे समय में उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा।
भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं। रक्षा, टेक्नोलॉजी और भू-राजनीति में भी दोनों देश सहयोगी रहे हैं। लेकिन टैरिफ विवाद से रिश्तों में खटास बढ़ने का खतरा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत इस मुद्दे को WTO (विश्व व्यापार संगठन) में ले जा सकता है। वहीं, भारत अपनी व्यापारिक साझेदारी को विविधतापूर्ण बनाने पर जोर दे सकता है – यानी यूरोप, खाड़ी देशों और एशियाई बाजारों में अपना दायरा बढ़ाना।
भारत और अमेरिका के बीच सालाना करीब 190 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है। इस टैरिफ युद्ध से दोनों देशों की कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा।
• भारत पर असर: निर्यात घटने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव।
• अमेरिका पर असर: उपभोक्ताओं को महंगे दाम चुकाने होंगे।
• वैश्विक असर: आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) और निवेश पर अनिश्चितता।
भारत और अमेरिका का रिश्ता सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और रणनीतिक साझेदारी पर भी टिका है। लेकिन आज यह रिश्ता टैरिफ की कसौटी पर खड़ा है। ट्रंप के इस फैसले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतंत्रें आर्थिक हितों की खींचतान में अपने रिश्तों की नींव हिला देंगी?
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