मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के वन परिक्षेत्र शाहपुर रेंज के बोदरली और खकनार क्षेत्र में सलाई पेड़ों को लेकर जंगलों में गोंद माफिया सक्रिय हैं। वन माफिया पहले सलाई के पेड़ों को चारों ओर से छील देते हैं, फिर उनमें जगह-जगह कुल्हाड़ी से घाव कर देते हैं। यही नहीं, वे इन घावों में कुछ केमिकल भी डालते हैं। इसके बाद इन पेड़ों से गोंद अधिक मात्रा में निकलने लगता है। हालांकि, इसके चलते सलाई के पेड़ धीरे-धीरे सूखने लगते हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है।
गौरतलब है कि जिले में सलाई के पेड़ों की संख्या पहले से ही बहुत कम हो गई है। अब जंगलों में गिने-चुने सलाई के पेड़ ही बचे हैं। इसके बावजूद वन विभाग इन पेड़ों को बर्बाद होने से बचाने में विफल रहा है, जिसे लेकर पर्यावरणविद लगातार शिकायत कर रहे हैं। इस संबंध में पूर्व में लोक जनशक्ति पार्टी के नेता जितेंद्र राव तोले ने भोपाल तक शिकायत की थी। लेकिन, वन विभाग के अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, अब नए डीएफओ से जिले की जनता को कुछ उम्मीद जरूर है।
बता दें कि बुरहानपुर जिले में अतिक्रमण के नाम पर पहले ही बड़ी संख्या में जंगलों के पेड़ काटे जा चुके हैं। अब जो थोड़े-बहुत सलाई के पेड़ बचे हैं, उन्हें भी गोंद माफिया बर्बाद कर रहे हैं। इन पेड़ों को बचाना बेहद जरूरी है। साथ ही, पर्यावरण को बचाने के लिए ऐसे ठेकेदारों के गोंद के लाइसेंस भी निरस्त किए जाने की मांग की जा रही है।
इस तरह से निकाला गया गोंद सेहत के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। वन विभाग ने शाहपुर रेंज, बोदरली रेंज और खकनार वन परिक्षेत्र के अंतर्गत गोंद निकालने के लाइसेंस समितियों को जारी कर दिए हैं। लेकिन, इन लाइसेंसों को जंगलों की वर्तमान स्थिति का भौतिक सत्यापन किए बिना ही नियमों का उल्लंघन कर जारी किया गया है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि एक ओर सरकार वृक्षारोपण के नाम पर हर साल लाखों रुपए खर्च कर रही है और दूसरी ओर वन विभाग गोंद निकालने के लिए लाइसेंस जारी कर पेड़ों को तबाह करने का कार्य करवा रहा है।