दमोह में रबी सीजन के लिए डीएपी खाद की उपलब्धता किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। हालात यह हैं कि जहां केवल 800 किसानों को खाद देने की व्यवस्था है, वहीं 3800 किसानों को कूपन बांट दिए गए हैं। इस अव्यवस्था की तस्वीरें गुरुवार को सामने आईं।
दमयंतीपुरम तहसील परिसर में किसानों को खाद के कूपन वितरण के लिए बुलाया गया था। सुबह से ही करीब 5 हजार किसान वहां पहुंच गए। भीड़ देखकर लग रहा था कि किसानों को खाद मिलेगी, लेकिन यह भीड़ सिर्फ कूपन के लिए थी। सुबह 5 बजे से 9 बजे के बीच करीब 3 हजार किसान लाइन में लग चुके थे, इसके बाद और 2 हजार किसान पहुंच गए।
बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए तहसीलदार, सागर नाका पुलिस, विपणन विभाग और संबंधित एजेंसियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। पूरा तहसील परिसर किसानों से भर गया था। भीड़ अधिक होने के कारण गेट बंद करना पड़ा, जिसके बाद ही कूपन वितरण शुरू किया गया।
गेट के बाहर भी किसानों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। कई किसानों के वाहन हाईवे किनारे खड़े होने से जाम जैसी स्थिति बन गई। बाहर खड़े किसान प्रदर्शन करते नजर आए। जब गेट खोला गया तो भगदड़ जैसे हालात बन गए और दूर खड़े किसान भी अंदर जाने की कोशिश में दौड़ पड़े। दोपहर तक यही स्थिति बनी रही।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि अब तक 3800 किसानों को कूपन बांटे जा चुके हैं। किसानों को स्पष्ट किया गया कि फिलहाल पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं है। शुरुआती कूपन पाने वाले किसान दो दिनों में खाद प्राप्त कर सकेंगे, जबकि बाकी किसानों को अगले रैक आने तक इंतजार करना होगा।
जानकारी के अनुसार, इस सीजन का पहला खाद रैक चार दिन पहले ही पहुंचा था और अब लगभग खत्म हो चुका है। 8 अक्टूबर तक अधिकांश खाद वितरित हो चुकी है। वर्तमान में केवल 120 टन खाद स्टॉक में है, जिसका वितरण शुक्रवार से शुरू होकर शनिवार तक किया जाएगा। इसके बाद डीएपी खाद जिले में पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और किसानों को फिर परेशानी झेलनी पड़ेगी।
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विपणन संघ प्रबंधक इंद्रपाल सिंह राजपूत ने बताया कि जिले में फिलहाल मात्र 116 मीट्रिक टन डीएपी खाद उपलब्ध है, जो लगभग 700–800 किसानों के लिए पर्याप्त है। दो दिनों में इसका वितरण किया जाएगा। 3800 कूपन में से शुरुआती किसानों को खाद मिलेगी, जबकि बाकी किसानों को अगला रैक आने पर खाद दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अगले रैक की तारीख तय नहीं है, लेकिन जल्द आने की संभावना है। फिलहाल किसानों को कूपन से ही संतोष करना पड़ रहा है।