दमोह पहुंचे राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने मिशन अस्पताल में हुई मौतों के मामले में सीएमएचओ मुकेश जैन को प्रमुख रूप से दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा कि सीएमएचओ ने आरोपियों को बचाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि मामले के दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा। बता दें, प्रियंक कानूनगो बुधवार को दमोह के मानस भवन में सकल वाल्मीकि समाज के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, जहां उन्होंने नगर पालिका के हड़ताली सफाई कर्मचारियों से सीएमओ के सामने ही उनकी वेतन संबंधी समस्याएं सुनीं।
सीएमएचओ ने नहीं की कार्रवाई
प्रियंक कानूनगो ने मिशन अस्पताल पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि सीएमएचओ ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने अस्पताल के लाइसेंस को लेकर सवाल उठाए। उनका कहा कि जिस डॉक्टर के नाम पर लाइसेंस दिया गया, वह निरीक्षण के दौरान मौजूद नहीं था। फिर भी अस्पताल को लाइसेंस कैसे मिल गया?
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अजय लाल को बचा रहा प्रशासन
कानूनगो ने आरोप लगाया कि सीएमएचओ और प्रशासन डॉक्टर अजय लाल को बचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा आर्थिक घोटाला है। आयुष्मान योजना के तहत फर्जी तरीके से राशि निकाली गई। फर्जी डॉक्टर से मरीजों की सर्जरी कराई गई, जिससे उनकी जान चली गई। कानूनगो ने कहा कि इस मामले में चाहे सीएमएचओ या कोई अन्य प्रशासनिक अधिकारी, जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मामले में ईओडब्ल्यू से भी जांच की मांग की है।
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नगर पालिका कर्मचारियों से मिले कानूनगो
प्रियंक कानूनगो नगर पालिका के उन सफाई कर्मियों के कार्यक्रम में पहुंचे थे, जो पिछले पांच दिनों से हड़ताल पर हैं। इस कार्यक्रम में कानूनगो ने सीएमओ प्रदीप शर्मा को मंच पर ही बुलाया और उनसे कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर बात की। नगर पालिका के आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों ने बताया कि उनका वेतन 4000 रुपए है, वह भी समय पर नहीं मिल रहा है। इस पर कानूनगो ने कहा कि यह अनर्थ और अन्याय है। इतने कम वेतन में 8 घंटे सफाई कराई जा रही है, यह नैतिक दृष्टि से पाप है और कानूनी दृष्टि से भी अपराध है। ऐसा करने वालों को जेल भेजा जाएगा। अगर, समय रहते आदेश के अनुसार न्यूनतम वेतन सफाई कर्मियों को नहीं दिया तो कार्रवाई की जाएगी।
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10500 रुपये मिले वेतन
प्रियंक कानूनगो ने कहा कि कम से कम साढ़े 10 हजार रुपए वेतन मिलना चाहिए, चाहे इसके लिए नगर पालिका को अपनी संपत्ति ही क्यों न बेचनी पड़े। देश के प्रधानमंत्री ने हमारे सफाई कर्मियों के पैर धोकर यह संदेश दिया है कि इनका सम्मान सबसे अधिक जरूरी है। सफाई कर्मियों की हड़ताल समाप्त करने को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह उनका काम नहीं है। यह स्थानीय नगर पालिका और जिला प्रशासन का काम है। वह सिर्फ यहां इसलिए आए हैं, क्योंकि मानव अधिकारों का हनन हो रहा है, जिसे रोकना उनका दायित्व है।