बसंत पंचमी पर्व पर भोजशाला में पांच दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है, आज शुक्रवार सुबह 7 बजे से ही परिसर में पूजा और आराधना के स्वर गूंजने के साथ ही हवन कुंड में पहली आहुति दी गई। बसंत उत्सव को लेकर भोजशाला सहित परिसर केसरिया पतको से सजाया गया है। गर्भगृह सहित परिसर में ही साढ़े पांच क्विंटल फूलों से विशेष सजावट की गई है। हवन कुंड के आसपास केले के पत्ते भी लगाए गए हैं। कुंड के समीप ही वेदारंभ संस्कार की शुरुआत भी हो गई है। यहां पर पर बच्चों को संस्कार के बारे में जानकारी देते हुए वेदारंभ किया जा रहा है। सूर्योदय होते ही मां वाग्देवी की प्रतिमा के साथ भोजशाला मुक्ति यज्ञ के गोपाल शर्मा एवं समिति के पदाधिकारियों के साथ मां वाग्देवी का स्वरूप विराजित कर मां वाग्देवी की आरती एवं स्तुति कर हवन कुंड में आहुति डाल कर अखंड पूजा की शुरुआत की गई।
दरअसल एक दिन पहले ही अखंड पूजा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी, जिसमें पूजा और नमाज को लेकर आदेश के बाद स्थिति स्पष्टी हो चुकी है। 23 जनवरी को हिंदू समाज भोजशाला में ही पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान करते हुए पूजन कर सकेगा। साथ ही मुस्लिम समाज भी नमाज पढेगा, हालांकि जुम्मे की नमाज में प्रशासन से हुई बातचीत में तय हुए समाजजन ही शामिल होंगे। गोपाल शर्मा के अनुसार हमारा विषय शुरू से ही अखंड पूजा का रहा हैं, कोर्ट से आदेश के बाद हम सूर्योदय से सूर्यास्ती तक पूजा अर्चना करेंगे। इधर परिसर में ही प्रशासन ने बैरिकेड से भी लगाए है। ताकि दर्शन व पूजन के लिए आने वाले समाजजनों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हो।
महाआरती भी होगी
महामंत्री सुमित चौधरी के अनुसार मां सरस्वती यज्ञ की प्रारंभ सुबह 7 बजे से हो चुका हैं। मां वाग्देवी के तेल चित्र के साथ शोभायात्रा की शुरुआत नगर के उदाजी राव चौपाटी स्थित लालबाग उधान से होगी। यात्रा की शुरुआत सुबह 10-30 बजे होगी, जिसमें खुली जीप में मुख्य वक्ता व अतिथि अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विहिप आलोक कुमार व सनातनी अखाडे के संयोजक स्वामी स्वदेशानन्द गिरी जी महाराज विराजित रहेंगे। करीब ढाई किलो मीटर का मार्ग तय करके शोभायात्रा 12 बजे भोजशाला प्रांगण पहुंचेगी। यात्रा में हजारों की संख्या में युवा, महिलाएं, युवतियां सहित ग्रामीण क्षेत्र से आई जनता शामिल होगी। बसंत पंचमी को दोपहर करीब 12-15 बजे धर्मसभा भोजशाला परिसर में होगी, जिसे मुख्य वक्त संबोधित करेंगे। करीब एक घंटे बाद दोपहर 1-15 बजे मां वाग्देवी के तेल चित्र की महाआरती अतिथि द्वारा की जाएगी।
प्रशासन की पैनी नजर
सुप्रीम कोर्ट से जारी आदेश के बाद अब भोजशाला में पूजा और नमाज दोनों होगी। प्रशासन को दोनों ही धार्मिक रूप से करवाना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी हैं, इसको लेकर एक माह पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी। प्रशासनिक अमले ने विशेष सुरक्षा रणनीति तैयार की है। भोजशाला और उसके आसपास के क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है, ताकि शांति और व्यवस्था बनी रहे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए भोजशाला के मुख्य प्रवेश मार्ग पर जिगजैग बैरिकेडिंग की गई है। दर्शन के लिए आने और जाने के दो अलग-अलग मार्ग तैयार किए गए है। करीब 8 हजार का पुलिसबल तैनात किया गया है, भोजशाला, परिसर सहित शहर को कुल 6 सेक्टरों में विभाजित किया है। आईजी अनुरागसिंह, कमिश्नर सुदामा खाडे, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, एसपी मयंक अवस्थी सहित आला अधिकारी हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।