मध्य प्रदेश के खंडवा में हाल ही में पशुओं की चर्बी से बनाए जा रहे कथित नकली घी की बड़ी खेप पकड़ी गई थी। जिला प्रशासन के अनुसार यह कार्रवाई मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर की गई। हालांकि, इसके बाद मौके पर पहुंचीं खंडवा विधायक कंचन तनवे ने इस कार्रवाई का श्रेय लेने की कोशिश की, वहीं खंडवा महापौर अमृता यादव ने भी इसे नगर निगम की कार्रवाई बताया। इसी बीच विपक्षी दल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जहां एक ओर इस कार्रवाई को बड़ी सफलता के रूप में पेश किया गया, वहीं दूसरी ओर अंदरूनी तौर पर आरोपियों पर हल्की धाराओं में मामला दर्ज कर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस का यह भी आरोप है कि प्रशासन द्वारा “नकली घी” की जगह केवल “पशुओं की चर्बी” शब्द का इस्तेमाल किया जाना भी संदेह पैदा करता है। साथ ही, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस कथित नकली घी का उपयोग किन लोगों द्वारा और किन खाद्य उत्पादों में किया जा रहा था। इस संबंध में किसी अन्य संबंधित व्यक्ति पर कार्रवाई न होने को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं और प्रदेश सरकार को घेरा है। जिला प्रशासन ने यह भी बताया था कि बरामद पशु चर्बी का उपयोग बुरहानपुर के कपड़ा पावरलूम में किया जा रहा था। इस पर कांग्रेस ने आपत्ति जताते हुए कहा कि ये क्षेत्र खंडवा लोकसभा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के प्रभाव क्षेत्र में आता है, इसलिए उन्हें बचाने के लिए मामले को कमजोर किया जा रहा है।
पढ़ें: महिला आरक्षण पर घमासान, कांग्रेस ने तत्काल 33% आरक्षण की उठाई मांग, भाजपा ने रखा ‘नारी शक्ति वंदन’ संकल्प
कांग्रेस नेता मुल्लू राठौड़ ने इसे आस्था से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि संभव है इस चर्बी का उपयोग खाद्य पदार्थों के साथ-साथ धार्मिक कार्यों, जैसे आरती के दीयों में इस्तेमाल होने वाले घी में भी हुआ हो, जिससे लोगों की आस्था आहत हो सकती है। उन्होंने मांग की कि इस मामले में शामिल सभी लोगों चाहे वे किसी भी पद पर हों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की, तो कांग्रेस जिला कलेक्टर कार्यालय में धरना देगी। वहीं, विधायक कंचन तनवे ने इसे प्रशासन की महत्वपूर्ण कार्रवाई बताते हुए आरोपियों पर रासुका जैसी कड़ी कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है।