खंडवा शहर के इमलीपुरा इलाके में लगने वाले साप्ताहिक गुरुवार बाजार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यह बाजार शहर के मुस्लिम बहुल क्षेत्र में हर गुरुवार को लगता है। यह लगभग 200 फुटकर दुकानदारों के परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन है। लेकिन हाल ही में इस बाजार को लेकर राजनीतिक और सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया है। हिंदू संगठनों और सत्ता पक्ष के कुछ जन प्रतिनिधियों ने इसे हटाने की मांग की है। जबकि मुस्लिम समाज और व्यापारियों ने इसका समर्थन करते हुए इसे अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने की कार्रवाई बताया है।
मुस्लिम समाज ने ज्ञापन देकर जताई आपत्ति
इस मामले को लेकर शनिवार को शहर काजी सैयद निसार अली के नेतृत्व में मुस्लिम समाज ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि अतिक्रमण के नाम पर छोटे व्यापारियों को परेशान न किया जाए। समाज ने आरोप लगाया कि निगम प्रशासन बहुसंख्यक वर्ग के दबाव में अल्पसंख्यक समुदाय के एक दिन के बाजार को हटाने की कोशिश कर रहा है, जबकि शहर के अन्य प्रमुख मार्गों और व्यावसायिक क्षेत्रों में पसरे स्थायी अतिक्रमण को नजरअंदाज किया जा रहा है।
‘छोटे व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई, सरकारी योजनाओं के खिलाफ’
ज्ञापन देने आए प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पीएम स्वनिधि योजना और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की शहरी असंगठित कामगार पोर्टल योजना छोटे व्यापारियों को सशक्त करने के उद्देश्य से बनाई गई हैं। ऐसे में गुरुवार बाजार को निशाना बनाना इन योजनाओं की मूल भावना के विपरीत है। समाज के नेताओं ने निगम प्रशासन पर आरोप लगाया कि यह कार्रवाई धर्म के आधार पर की जा रही है और यह सरकार की नीतियों का उल्लंघन है।
महापौर कार्यालय के सामने भी पसरा अतिक्रमण
कांग्रेस नेता इमरान गौरी ने निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि महापौर कार्यालय के सामने स्थित लकड़ी बाजार क्षेत्र में सड़क का तीन-चौथाई हिस्सा स्थायी अतिक्रमण की चपेट में है। इस क्षेत्र में फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाएं भी पहुंचने में असमर्थ हैं। उन्होंने इसे प्रशासन की निष्क्रियता और पक्षपातपूर्ण रवैया करार दिया।
अन्य स्थायी अतिक्रमण पर नहीं हो रही कार्रवाई
वहीं, पार्षद शब्बीर कादरी ने रविवार को लगने वाले बाजार की वैधता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इसे निगम के प्रस्ताव के बिना चलाया जा रहा है। समाजसेवी जाहिद अहमद ने आरोप लगाया कि शहर के मोघट थाने के पास स्थित तीन सरकारी पार्कों पर कुछ टेंट और कैटरिंग व्यवसायियों का अवैध कब्जा है। इन कब्जों से निगम को भारी राजस्व प्राप्त हो सकता है, लेकिन अधिकारी इस पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इसके बजाय, वहां से अवैध आय अर्जित की जा रही है।
राजनीतिक और सांप्रदायिक तनाव की भेंट चढ़ा बाजार
दरअसल, इमलीपुरा का गुरुवार बाजार स्थानीय रहवासियों और दुकानदारों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। बाजार में व्यापार करने वाले दुकानदारों का कहना है कि यह बाजार न केवल उनकी आजीविका का साधन है, बल्कि स्थानीय लोगों को सस्ती और सुविधाजनक खरीदारी का मौका भी देता है। बावजूद इसके, बाजार राजनीति और सांप्रदायिक तनाव का शिकार हो गया है।