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Khandwa News: निमाड़ में आदिवासी महापर्व भगोरिया मेले की धूम, कभी यहां लोग अपने लिए चुनने आते थे जीवनसाथी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा Published by: खंडवा ब्यूरो Updated Mon, 10 Mar 2025 07:50 AM IST
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मध्यप्रदेश के खंडवा सहित पूरे निमाड़ अंचल में इन दिनों आदिवासी लोकपर्व भोंगर्या की धूम है। स्थानीय भाषा में इसे भगोरिया भी कहा जाता है। इसी दौरान खंडवा जिले का सबसे बड़ा भगोरिया मेला पंधाना ब्लॉक के ग्राम बोरगांव में लगा, जिसमें आदिवासी संस्कृति की रंग बिरंगी परंपरा दिखाई दी। यहां खास बात यह थी कि इस पर्व मनाने बड़ी संख्या में आदिवासी पलायन स्थलों से भी वापस अपने गांव पहुंचे थे। मेले में विभिन्न रंगों में सजे आदिवासी युवक-युवती ढोल मांदल के थाप पर झूमते दिखाई दिए।
बता दें कि आदिवासियों के इस सबसे महत्वपूर्ण पर्व पर सदियों से चली आ रही परंपरा को उन्होंने अब तक संजो के रखा हुआ है। खंडवा जिले में एक सप्ताह तक चलने वाले इस भगोरिया पर्व का समापन होलिका दहन के साथ होगा। होली के सात दिन पहले से जिले के अलग-अलग इलाकों में लगने वाले भोंगर्या बाजार में आदिवासी पारंपरिक अंदाज में सज-धजकर पहुंच रहे हैं। आदिवासियों के लिए ये किसी त्योहार जैसा ही होता है। जिले का सबसे बड़ा भोंगर्या हाट पंधाना विधानसभा के बोरगांव बुजुर्ग में जारी है। यहां मेले में पहुंचे हजारों की संख्या में वनांचल के ग्रामीणों ने जमकर खरीददारी की। यही नहीं, उन्होंने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली पर्व की बधाई भी दी। हाट में लगे झूलों का भी युवक-युवतियों ने जमकर आनंद लिया । वहीं बच्चों ने खाने-पीने की वस्तुओं के साथ खिलौने भी खूब खरीदे। खानपान के बदलते दौर में भी यहां गुड़ से बनने वाली जलेबी, शकर के बने हाथ कंगन, और पान आज भी पसंद किया जा रहा है।
एक दूसरे को पसंद करने का दौर अब हुआ खत्म
वहीं बदलते परिवेश में समाज के युवक-युवतियां परंपरागत परिधानों के साथ ही आजकल के फैशन में भी नजर आए। यहां कोई खाने-पीने में व्यस्त था, तो कोई मोबाइल फोन से सेल्फी लेने में। इस दौरान बांसुरी की धुन और ढोल-मांदल की थाप पर बड़े बुजुर्ग एवं युवा जमकर थिरके। पुराने समय में फागुन में आने वाले इस पर्व पर सजे-धजे युवक-युवती एक दूसरे को पसंद भी करते हैं । एक दूसरे को गुलाल लगाते और इस प्रकार नए रिश्तों का भी यहां जन्म होता है, लेकिन अब यह पर्व सिर्फ होली और मौज मस्ती से जुड़ गया है, जिसमें हर उम्र के लोग भरपूर आनंद लेते हैं। साथ ही प्राचीन परंपरा जिसे गोदना कहा जाता है, जो टैटू का ही एक रूप है उसे भी लोग शौक से बनवाते नजर आते हैं।
विधायक छाया मोरे भी पहुंचीं भोंगर्या मनाने
भोंगर्या पर्व के बीच पंधाना की विधायक छाया मोरे बोरगांव बुजुर्ग पहुंची और भगोरिया पर्व में शामिल हुईं। आदिवासियों के बीच पहुंचकर उन्होंने मांदल की थाप पर आदिवासी भाइयों के साथ नृत्य भी किया। जिले के डोंगरगांव, गुड़ी, भीलखेड़ी, पंधाना बड़ा बोरगांव, खालवा, खारकला, सिंगोट, दिवाल, बड़ोदा अहीर गांव में पर्व का उत्साह चरम पर है। इस पर्व को लेकर विधायक छाया मोरे ने बताया कि आदिवासी समाज होली के सात दिन पूर्व हाट बाजार में भगोरिया लगता है, जिसमें आदिवासी अपनी परंपरिक वेशभूषा में पहुंचते हैं। गीत संगीत के साथ एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं और मेले का आनंद लेते हैं। भगोरिया के माध्यम से आदिवासी समाज अपनी संस्कृति से जुड़ा हुआ है।
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