मैहर के ताला क्षेत्र में आयोजित भाजपा के एक कार्यक्रम के दौरान हुए विवाद ने अब नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। बीते दिनों इस मामले में पूर्व मंत्री के भाई एवं क्षेत्र के चर्चित समाजसेवी विजय पटेल पर विवाद और अभद्रता के आरोप लगाए गए थे। मामला स्थानीय स्तर पर काफी चर्चाओं में रहा और राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा होती रही।
लेकिन अब सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने पूरे घटनाक्रम की तस्वीर बदल दी है। वायरल वीडियो में भाजपा के जिला महामंत्री मनीष चतुर्वेदी एक व्यक्ति से बहस करते और कथित रूप से थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर घटना का वास्तविक पक्ष क्या है और शुरुआती आरोपों का आधार क्या था।
सांसद के कार्यक्रम में हुआ था विवाद
जानकारी के अनुसार ताला क्षेत्र में सांसद के कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान किसी बात को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई उस समय सामने आई जानकारी में विजय पटेल पर विवाद करने के आरोप लगाए गए थे।
कुछ लोगों द्वारा यह दावा किया गया था कि कार्यक्रम का माहौल खराब करने में उनकी भूमिका रही। हालांकि उस समय घटना के कोई स्पष्ट वीडियो सामने नहीं आए थे, जिसके चलते लोग केवल आरोपों और बयानों के आधार पर ही अपनी राय बना रहे थे।
वायरल वीडियो ने बदली पूरे मामले की दिशा
घटना के कई दिन बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें भाजपा जिला महामंत्री मनीष चतुर्वेदी विवाद करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कथित तौर पर वे एक व्यक्ति को थप्पड़ मारते भी नजर आ रहे हैं वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई कि जिस व्यक्ति ने दूसरे पक्ष पर आरोप लगाए थे, वही खुद विवाद में शामिल दिखाई दे रहा है।
इससे पूरे मामले की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वायरल वीडियो ने घटना के संबंध में पहले से बनी धारणाओं को पूरी तरह बदल दिया है और अब पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो गई है।
विजय पटेल के समर्थकों ने उठाए सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद विजय पटेल के समर्थकों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि शुरुआत से ही एकतरफा तरीके से आरोप लगाए गए और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। समर्थकों का दावा है कि वीडियो ने यह साबित कर दिया है कि घटना को लेकर जो तस्वीर लोगों के सामने प्रस्तुत की गई थी, वह पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
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पुलिस तक पहुंचा था मामला, लेकिन कार्रवाई पर संशय
सूत्रों के अनुसार विवाद के बाद मामला पुलिस तक भी पहुंचा था। दोनों पक्षों की ओर से शिकायत और प्रतिशिकायत की चर्चाएं सामने आई थीं। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पुलिस ने मामले में क्या कार्रवाई की, किसी पक्ष पर कोई कानूनी प्रकरण दर्ज हुआ या नहीं, अथवा दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया।स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मामला सार्वजनिक मंच पर हुआ और वीडियो भी सामने आ चुका है, तब प्रशासन को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि अफवाहों और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर विराम लग सके।