मंदसौर जिला कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार की जनसुनवाई उस वक्त चर्चा का विषय बन गई जब एक ग्रामीण पूरे शरीर पर केले के पत्ते लपेटकर अपनी शिकायत लेकर पहुंचा। यह दृश्य किसी रंगमंचीय नाटक का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक ऐसे आम नागरिक की सरकार को झकझोरने की कोशिश थी, जो शासकीय जमीन को अतिक्रमण से बचाने के लिए एक साल से संघर्ष कर रहा है।
यह अनोखा प्रदर्शन करने वाले शख्स हैं पन्नालाल सेन, जो मंदसौर जिले की दलोदा तहसील के लाला खेड़ा गांव के निवासी हैं। उनका कहना है कि गांव में स्थित सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निजी धर्मशाला का निर्माण किया जा चुका है, जिसकी शिकायत उन्होंने एक वर्ष पूर्व की थी। लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी न तो प्रशासन ने जांच की, और न ही कोई ठोस कदम उठाया।
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आम नागरिक, लेकिन उद्देश्य बड़ा
पन्नालाल न तो जनप्रतिनिधि हैं, न ही किसी संगठन से जुड़े कार्यकर्ता। वह एक सामान्य नागरिक हैं, जो जनहित में सरकारी जमीन को अतिक्रमण से बचाने की मुहिम में अकेले लगे हुए हैं। अपनी जेब से खर्च कर वे लगातार प्रशासनिक अधिकारियों के पास शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई न होने से उनका धैर्य जवाब दे चुका था। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब कोई नहीं सुनता, तो मजबूरी में ऐसा रास्ता अपनाना पड़ता है। प्रशासन को झकझोरने के लिए मुझे अपने शरीर पर केले के पत्ते लपेटने पड़े ताकि किसी तरह मेरी बात सुनी जाए।
प्रशासन को दिखाया आईना
पन्नालाल सेन का यह अनोखा प्रदर्शन कलेक्टर कार्यालय के बाहर मौजूद हर व्यक्ति के लिए एक गहरा संदेश बनकर उभरा। वह नारे नहीं लगा रहे थे, मंच नहीं सजा था, बस एक मौन विरोध था जो दर्शा रहा था कि कैसे एक जागरूक नागरिक अपने स्तर पर सरकार को उसका ही नुकसान दिखा रहा है। पन्नालाल का यह विरोध प्रदर्शन भ्रष्टाचार और लापरवाही की उस जड़ पर सवाल खड़ा करता है, जहां एक सरकारी कर्मचारी या अधिकारी के उदासीन रवैये के कारण जनता की संपत्ति को हड़प लिया जाता है।
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