मुरैना जिले के पोरसा में पुलिस और टीआई के खिलाफ आंदोलन करने पहुंचे करणी सेना के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच उस समय झड़प और जमकर धक्कामुक्की हुई, जब कार्यकर्ता नेशनल हाईवे 552 पर जाम लगाने की कोशिश करने लगे।जाम की स्थिति बनते ही पुलिस ने करणी सेना के जिलाध्यक्ष विष्णु तोमर सहित दो कार्यकर्ताओं को सड़क से उठाकर थाने में बैठा लिया, जिससे माहौल और ज्यादा बिगड़ गया।
करणी सेना के जिला अध्यक्ष विष्णु तोमर लगभग 10 कार्यकर्ताओं के साथ पोरसा थाने के सामने नेशनल हाईवे 552 पर पहुंचे थे। यहां उन्होंने पुलिस और टीआई के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया। कार्यकर्ताओं ने सड़क पर बैठकर जाम लगाने की कोशिश की। जैसे ही जाम लगने की स्थिति बनी, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जिलाध्यक्ष सहित दो लोगों को सड़क से उठाकर थाने ले गई। इसी दौरान करणी सेना और पुलिस के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। आरोप है कि जिलाध्यक्ष ने पुलिस कर्मियों को भला-बुरा कहा, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक थाने में बैठा लिया।
प्रदर्शन के दौरान करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने पुलिस के खिलाफ जमकर मुर्दाबाद के नारे लगाए।थाना प्रभारी टीआई दिनेश कुशवाहा को हटाने की मांग की गई।टीआई पर पैसे लेने जैसे आरोप लगाते हुए नारेबाजी भी की गई। स्थिति तब और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई जब करणी सेना के कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए।पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए जिलाध्यक्ष विष्णु तोमर को कॉलर पकड़कर खींचा और धक्का देते हुए थाने के अंदर ले गई।यह दृश्य देखकर अन्य कार्यकर्ता इधर-उधर भागते नजर आए।
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जानकारी के अनुसार पोरसा थाना क्षेत्र में आदतन अपराधी गुरु ग्रुप और बंटू तोमर तथा उमेश राजावत के बीच झगड़ा हो गया था।इस विवाद में पुलिस ने दोनों पक्षों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें बंद कर दिया था।करणी सेना के जिलाध्यक्ष विष्णु तोमर ने बंटू तोमर और उमेश राजावत की सिफारिश टीआई से की थी।लेकिन टीआई ने किसी एक पक्ष को राहत देने के बजाय दोनों पक्षों पर समान रूप से कार्रवाई की।इसी बात से जिलाध्यक्ष नाराज बताए जा रहे थे।
पोरसा थाना प्रभारी टीआई दिनेश कुशवाहा ने बताया कि लोकतंत्र में सभी को प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन उसके लिए प्रशासनिक अनुमति लेना जरूरी होता है। बिना अनुमति के प्रदर्शन किया जा रहा था और नेशनल हाईवे जाम करने की कोशिश की जा रही थी, जिससे शांति भंग हो सकती थी। उन्होंने कहा कि पोरसा कस्बा नेशनल हाईवे से जुड़ा है।अगर सड़क जाम होती है तो यात्रियों को परेशानी होती है। सड़क जाम करना गैरकानूनी है।