बुंदेलखंड क्षेत्र के सुप्रसिद्ध सिद्धपीठ अछरु माता मंदिर में चल रहे लोक निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में घटिया और गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे न केवल धार्मिक स्थल की गरिमा प्रभावित हो रही है, बल्कि करोड़ों रुपये के शासकीय धन के दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है।
गौरतलब है कि बुंदेलखंड का यह प्रमुख धार्मिक स्थल पहाड़ियों पर स्थित है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। जनमान्यता है कि माता भक्तों को प्रत्यक्ष रूप से आशीर्वाद देती हैं। इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अछरु माता लोक के निर्माण की घोषणा की थी और लगभग 5 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी।
स्थानीय लोगों के अनुसार अब तक करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से कुछ निर्माण कार्य किए जा चुके हैं, लेकिन अधिकारियों की मॉनिटरिंग के अभाव में निर्माण एजेंसी और ठेकेदार मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नहीं है। कई स्थानों पर सीमेंट, रेत और पेवर्स की गुणवत्ता कमजोर बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अभी तक केवल कुछ दुकानों का निर्माण, विद्युत पोल स्थापना और पेवर्स बिछाने का कार्य ही हुआ है, जबकि समग्र विकास की योजना अधूरी पड़ी है।
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इस संबंध में क्षेत्र के पृथ्वीपुर विधायक से चर्चा की गई। उन्होंने अछरु माता को क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बताते हुए मामले को गंभीरता से लिया है। विधायक ने संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश देने, निर्माण कार्य की गति बढ़ाने और स्वयं स्थल का निरीक्षण करने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रकार का भ्रष्टाचार सामने आता है तो इसकी शिकायत मुख्यमंत्री तक की जाएगी।
वहीं पृथ्वीपुर एसडीएम अशोक सेन ने बताया कि मामले की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने भी शीघ्र जांच कर गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने की मांग की है।