गुना नगर पालिका परिषद में सोमवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बर्खास्त संविदा कर्मचारी करण मालवीय ने डिप्टी कलेक्टर एवं प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) मंजूषा खत्री के कक्ष में कथित रूप से जहरीला पदार्थ पी लिया। घटना के तुरंत बाद मौजूद कर्मचारियों ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल उसकी हालत स्थिर है।
जानकारी के मुताबिक, करण मालवीय को कुछ समय पूर्व फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों से जुड़े एक मामले में दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक कर दिया गया था। करण का आरोप है कि उसे बिना कारण बताओ नोटिस दिए और बिना विभागीय जांच के सीधे हटा दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
सोमवार शाम वह इसी संबंध में अपना पक्ष रखने और सेवा समाप्ति आदेश पर पुनर्विचार की मांग को लेकर प्रभारी सीएमओ के कक्ष में पहुंचा था। बताया जाता है कि चर्चा के दौरान संतोषजनक आश्वासन न मिलने से वह व्यथित हो गया और उसने साथ लाया कथित जहरीला पदार्थ पी लिया। घटना के बाद कार्यालय में हड़कंप मच गया और तत्काल एंबुलेंस बुलाकर उसे जिला अस्पताल भेजा गया।
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करण ने यह भी आरोप लगाया है कि जिस प्रकरण में उसे हटाया गया, उसी मामले में अन्य स्थायी कर्मचारियों को निलंबित कर बाद में बहाल कर दिया गया, जबकि संविदा कर्मी होने के कारण केवल उसे ही सेवा से बाहर कर दिया गया। उसका यह भी दावा है कि सेवा समाप्ति आदेश के बाद भी विभाग ने उससे लगभग दो माह तक कार्य लिया, लेकिन उस अवधि का वेतन अब तक नहीं दिया गया।
वहीं प्रभारी सीएमओ मंजूषा खत्री ने वीडियो बयान जारी कर स्पष्ट किया कि फर्जी हस्ताक्षर का मामला अगस्त माह का है, जिसमें संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की गई थी। शासन के निर्देशानुसार अतिरिक्त संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति बिना अनुमति नहीं की जा सकती। हटाए गए कर्मचारियों को पिछले छह माह से स्थिति समझाई जा रही थी। सोमवार को कुछ आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा कार्यालय में आवेदन देने का प्रयास किया गया, उसी दौरान उक्त कर्मचारी ने कथित रूप से यह कदम उठा लिया। जिला अस्पताल में उसका इलाज जारी है और हालत सामान्य बताई जा रही है।
उल्लेखनीय है कि नगर पालिका में पिछले कुछ समय से नपाध्यक्ष और प्रशासनिक अमले के बीच खींचतान की चर्चाएं रही हैं। इस रस्साकशी का असर निचले स्तर के कर्मचारियों, विशेषकर संविदा कर्मियों पर पड़ने की बात भी सामने आती रही है।