नर्मदापुरम जिले का ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध संत शिरोमणि श्री रामजी बाबा मेला इन दिनों शहर के गुप्ता ग्राउंड में पूरे उत्साह और श्रद्धा भाव के साथ संचालित हो रहा है। यह मेला केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि जिले की सांस्कृतिक पहचान और हिंदू-मुस्लिम एकता का भी बड़ा प्रतीक माना जाता है।
मेले में प्रतिदिन धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंच रहे हैं। रामजी बाबा के समाधि स्थल पर दर्शन के लिए रोजाना हजारों लोग आ रहे हैं और बाबा से आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। श्रद्धालुओं में यह मान्यता भी प्रचलित है कि रामजी बाबा मेले में आने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
400 साल पुरानी परंपरा, हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल
नर्मदापुरम प्राचीन काल से ही सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारे के लिए प्रसिद्ध रहा है। करीब 400 साल पहले रामजी बाबा और सूफी संत गौरीशाह बाबा की दोस्ती ने इस क्षेत्र में अमन-चैन के बीज बोए थे। यही कारण है कि आज भी यहां हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिलती है।मेले की शुरुआत भी इसी परंपरा के अनुसार गौरीशाह बाबा की दरगाह पर चादर चढ़ाने की रस्म के साथ की गई।
कैसे बनी समाधि स्थल की छत
मान्यता के अनुसार जब रामजी बाबा के समाधि स्थल का निर्माण हो रहा था, तब उसकी छत नहीं बन पा रही थी। इसी दौरान एक भक्त को सपना आया कि जब तक गौरीशाह बाबा की दरगाह से पत्थर लाकर यहां नहीं लगाया जाएगा, तब तक छत नहीं बनेगी। बाद में जब ऐसा किया गया तो छत का निर्माण पूर्ण हो गया। इसी तरह दरगाह पर भी रामजी बाबा के समाधि स्थल से पत्थर लाकर लगाया गया था।
तब से आज तक यह परंपरा निभाई जा रही है कि रामजी बाबा मेले के शुभारंभ पर समाधि से दरगाह पर चादर पेश की जाती है और गौरीशाह बाबा के उर्स पर दरगाह से समाधि पर निशान चढ़ाया जाता है।बताया गया है कि यह मेला जनवरी से प्रारंभ हुआ था, जो 20 फरवरी तक संचालित किया जाएगा। इस दौरान प्रतिदिन अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे मेले की रौनक लगातार बढ़ती जा रही है।
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मेले में इस बार झूलों ने केंद्र बिंदु बनकर खास आकर्षण पैदा किया है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोग झूलों का आनंद लेते नजर आ रहे हैं। लोगों ने विभिन्न प्रकार के झूलों में झूलकर अपने बचपन की यादों को ताजा किया। झूलों के साथ रंग-बिरंगी लाइटिंग, फिल्मी स्टाइल में बजते गाने और उत्साहपूर्ण माहौल ने मेले को और भी जीवंत बना दिया है।
झूलों की सुरक्षा को लेकर विशेष निगरानी व्यवस्था भी की गई है। जानकारी के अनुसार झूलों के संचालन हेतु एक विशेष निगरानी दल गठित किया गया है, जो झूलों की मरम्मत, बैठाने की व्यवस्था और नियमित गति से संचालन तक हर बिंदु पर ध्यान रख रहा है। वहीं किसी भी प्रकार की जनहानि से बचाव के लिए पुलिस विभाग भी नियम अनुसार निगरानी में लगातार लगा हुआ है। झूलों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ भीड़ नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सुरक्षा और व्यवस्था पर प्रशासन सतर्क
मेले में झूलों का आकर्षण भी लोगों को खूब भा रहा है। दुकानों पर खरीदारी के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। वहीं यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए प्रशासन और पुलिस विभाग सतर्क हैं। पुलिस द्वारा असामाजिक तत्वों पर भी लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि मेला शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके।
कुल मिलाकर, श्री रामजी बाबा मेला श्रद्धा, संस्कृति, परंपरा और आपसी सद्भाव का ऐसा संगम है, जो नर्मदापुरम जिले की पहचान को और भी गौरवशाली बनाता है।