नर्मदापुरम में नर्मदा नदी के कर्बला घाट पर स्थित एक दरगाह को नगर पालिका प्रशासन द्वारा हटाए जाने के बाद शुक्रवार को विवाद गहरा गया। कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग नगर पालिका कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया। समाज के लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने धार्मिक स्थल हटाने जैसी संवेदनशील कार्रवाई समाज के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना की। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि दरगाह पर चढ़ी धार्मिक चादर को जला दिया गया, जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। मामले को लेकर समाज ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मुस्लिम कमेटी के जिला सचिव मोहम्मद जुनेद ताजी ने कहा कि कर्बला घाट स्थित यह दरगाह वर्षों पुरानी आस्था का केंद्र है, जहां पीढ़ियों से लोग श्रद्धा व्यक्त करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि मुहर्रम के दौरान ताजिया विसर्जन के समय भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। उनका सवाल है कि यदि नगर पालिका का दावा है कि केवल पक्का निर्माण हटाया गया है, तो फिर दरगाह पर चढ़ी धार्मिक चादर किसने जलाई? उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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वहीं, नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) वैभव देशमुख ने समाज की ओर से लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों से सूचना मिलने के बाद नर्मदा तट पर बने धार्मिक निर्माण को हटाने के निर्देश प्राप्त हुए थे। सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार नदी, जलाशय या अन्य वाटर बॉडी में बने स्थायी अतिक्रमणों को हटाने के लिए अलग से नोटिस देना आवश्यक नहीं होता। इसी प्रक्रिया के तहत नगर पालिका ने कार्रवाई करते हुए केवल पक्के निर्माण को हटाया है।
सीएमओ देशमुख ने धार्मिक चादर जलाने के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नगर पालिका के कर्मचारियों ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह की किसी घटना की जानकारी नहीं है। यदि चादर जलाने की कोई घटना सामने आती है तो उसकी जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल दरगाह हटाने की कार्रवाई और धार्मिक चादर जलाने के आरोपों को लेकर नर्मदापुरम में माहौल गरमाया हुआ है। एक ओर मुस्लिम समाज प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, वहीं नगर पालिका इसे न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की गई कार्रवाई बता रही है। ऐसे में दोनों पक्षों के दावों के बीच पूरे घटनाक्रम की सच्चाई अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।