मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के गोंदरा गांव में अवैध ब्लैक स्टोन (काला पत्थर) उत्खनन का मामला सामने आया है। छोटे जिलों में खनिज विभाग का अस्तित्व केवल कागजों तक सीमित होने और प्रशासनिक निगरानी की शिथिलता के कारण माफिया खुलेआम प्राकृतिक संपदा को लूट रहे हैं। स्थानीय ग्रामीण डर के साए में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।
जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर हो रहा खेल
गोंदरा गांव, जो आदिवासी बहुल है और जिसकी आबादी लगभग एक हजार है, कभी स्थानीय स्टोन क्रेशर रोजगार का साधन थे। अब बड़ी कंपनियों की मशीनों के कारण उत्खनन कई गुना बढ़ गया है, जिससे स्थानीय मजदूरों के रोजगार सीमित हो गए हैं।
NGT के नियमों का उल्लंघन
सूत्रों के अनुसार प्रभावशाली कंपनियां और माफिया NGT के नियमों की अनदेखी कर ब्लास्टिंग कर रहे हैं। तेज धमाकों और उड़ते पत्थरों से ग्रामीणों की जान खतरे में है। खेत, घर और सड़कें पत्थरों से पटी रहती हैं। शासन को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, लेकिन डर के कारण ग्रामीण विरोध नहीं कर पा रहे।
अवैध ब्लास्टिंग और माफिया का दबदबा
एनजीटी और वन विभाग के नियमों के बावजूद बड़ी कंपनियां लीज क्षेत्र के बाहर अवैध उत्खनन कर रही हैं। किसानों की जमीनें औने-पौने दामों में खरीदी जा रही हैं और रोजाना सैकड़ों ट्रक पत्थर बाहर भेजे जा रहे हैं।
मीडिया पहुंचने पर माफिया भागे
अमर उजाला की टीम ने मौके पर जाकर अवैध उत्खनन का साक्ष्य दर्ज किया। मीडिया की मौजूदगी में माफिया मशीनें छोड़कर फरार हो गए।
ग्रामीणों ने NGT में शिकायत दर्ज कराई
डरे-सहमे ग्रामीणों ने NGT में शिकायत दर्ज कर राहत की मांग की है। सुनील ठाकुर ने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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जिला कलेक्टर ने कार्रवाई का आश्वासन दिया
कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। वहीं खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी नजर नहीं आया और विभागीय कार्यालय आम जनता के लिए खुले नहीं थे।