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US-Iran tensions have impacted the Basmati rice trade, with exports stalled, leading to a drop in prices.
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MP: अमेरिका-इस्राइल व ईरान युद्ध का बासमती चावल पर बड़ा असर, कीमतों में भारी गिरावट; निर्यातकों की चिंता बढ़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायसेन Published by: रायसेन ब्यूरो Updated Sat, 07 Mar 2026 04:15 PM IST
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मध्य एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इस्राइल व ईरान के बीच बने युद्ध जैसे हालातों का असर अब भारत के बासमती चावल कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण बासमती चावल का निर्यात लगभग ठप हो गया है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार और किसानों की आय पर पड़ रहा है। निर्यात रुकने से बाजार में मांग घट गई है और बासमती चावल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।
व्यापारियों के अनुसार पिछले दो दिनों से बासमती चावल का एक्सपोर्ट लगभग बंद हो गया है। बड़ी मात्रा में चावल के कंसाइनमेंट समुद्री रास्तों और विभिन्न बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं। अनुमान है कि करीब चार लाख टन से अधिक बासमती चावल इस समय समुद्र में या पोर्ट पर अटका हुआ है, जिससे निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।
ईरान सहित खाड़ी देशों में भारतीय बासमती चावल की काफी मांग रहती है। खासकर बासमती सेला 1509, 1121, सुगंधा और शरबती जैसी किस्मों की खपत इन देशों में अधिक है। लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण व्यापार पूरी तरह प्रभावित हो गया है। शिपिंग कंपनियों और समुद्री मार्गों में अनिश्चितता बढ़ने से नए ऑर्डर भी नहीं मिल रहे हैं।
दामों में प्रति क्विंटल करीब 800 से 1000 रुपये तक की गिरावट
निर्यात बंद होने का असर घरेलू बाजार में भी साफ नजर आ रहा है। व्यापारियों के मुताबिक मांग में आई कमी के कारण बासमती चावल के दामों में प्रति क्विंटल करीब 800 से 1000 रुपये तक की गिरावट देखी जा रही है। मंडियों में खरीदार कम हो गए हैं और कई जगहों पर व्यापार लगभग ठहर सा गया है।
मध्यप्रदेश के रायसेन जिले से भी बड़ी मात्रा में बासमती चावल का विदेशों में निर्यात किया जाता है। यहां स्थित चावल मिलों में तैयार होने वाला बासमती चावल ईरान और अन्य खाड़ी देशों में भेजा जाता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालातों के कारण अब इस कारोबार पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
निर्यात कारोबार पर गंभीर असर
रायसेन जिले में स्थित अपर्णा फूड मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय हालातों के चलते बासमती चावल के निर्यात पर टैक्स बढ़ गया है और शिपिंग लागत भी कई गुना बढ़ चुकी है। इससे निर्यात कारोबार पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि भारत से हर साल बड़ी मात्रा में बासमती चावल ईरान सहित कई देशों में भेजा जाता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में व्यापारी नए सौदे करने से भी बच रहे हैं।
कंटेनर का बड़ा खर्च
व्यापारियों के अनुसार समुद्री मार्गों पर अस्थिरता का सबसे अधिक असर रेड सी यानी लाल सागर रूट पर देखने को मिल रहा है। यह मार्ग भारत से खाड़ी और यूरोपीय देशों के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस रूट पर जोखिम बढ़ने से शिपिंग कंपनियों ने भी अपने किराए में भारी वृद्धि कर दी है।
पहले जहां एक कंटेनर को विदेश भेजने में करीब 2000 डॉलर का खर्च आता था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 9000 डॉलर प्रति कंटेनर तक पहुंच गया है। इतनी अधिक लागत बढ़ने के कारण निर्यात करना व्यापारियों के लिए मुश्किल हो गया है। कई निर्यातकों ने फिलहाल अपने शिपमेंट रोक दिए हैं।
व्यापारियों का कहना है कि अगर जल्द ही अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं हुए तो इसका बड़ा नुकसान किसानों, मिलर्स और व्यापारियों सभी को उठाना पड़ सकता है। बासमती चावल उद्योग से लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है और निर्यात रुकने से पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल सभी की नजरें अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और समुद्री मार्गों की स्थिति पर टिकी हुई हैं। व्यापारियों को उम्मीद है कि जल्द ही हालात सामान्य होंगे और बासमती चावल का निर्यात फिर से सुचारू रूप से शुरू हो सकेगा। तब तक बाजार में अनिश्चितता और कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है।
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