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No Crematorium, Muddy Track: MP Villagers Carry Corpse In Sludge, Funeral Held Under Polythene Sheet
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MP: बीना में अंतिम विदाई भी हुई मुश्किल, कीचड़ में अर्थी लेकर चले ग्रामीण; टूटे शेड के नीचे हुआ दाह संस्कार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर Published by: सागर ब्यूरो Updated Sun, 16 Aug 2026 12:12 PM IST
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मध्य प्रदेश के बीना की गड़ा ग्राम पंचायत के रामनगर गांव से प्रशासनिक अनदेखी और बदहाल बुनियादी सुविधाओं की दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। यहां 60 वर्षीय मूलचंद आदिवासी के निधन के बाद परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गांव में मुक्तिधाम नहीं होने और रास्ते में कीचड़ व दलदल के कारण ग्रामीणों को अंतिम यात्रा बेहद मुश्किल हालात में निकालनी पड़ी।
कीचड़ भरे रास्ते से गुजरी अंतिम यात्रा
शनिवार को बीमारी के चलते मूलचंद आदिवासी का निधन हो गया था। रामनगर में मुक्तिधाम की सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीण शव को अंतिम संस्कार के लिए करीब दो किलोमीटर दूर गोदना गांव ले जाने को मजबूर हुए। रास्ते का करीब आधा किलोमीटर हिस्सा बारिश के कारण गहरे कीचड़ में तब्दील हो चुका था। ग्रामीण कंधों पर अर्थी लेकर कीचड़ में फिसलते और संभलते हुए आगे बढ़े।
टूटे टीन शेड के नीचे करना पड़ा अंतिम संस्कार
गोदना गांव पहुंचने के बाद भी ग्रामीणों की परेशानी खत्म नहीं हुई। वहां बने मुक्तिधाम का टीन शेड पूरी तरह क्षतिग्रस्त था। लगातार बारिश के बीच चिता को पानी से बचाने के लिए पक्की छत तक उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में परिजनों और ग्रामीणों ने पॉलीथिन तानकर बारिश से बचाव किया और उसी के नीचे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की।
ग्रामीणों ने की मूलभूत सुविधाओं की मांग
घटना ने गांवों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ असुविधा का मामला नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति को अंतिम विदाई देने की गरिमा से जुड़ा सवाल है। उन्होंने रामनगर में व्यवस्थित मुक्तिधाम बनाने और गोदना जाने वाले रास्ते को पक्का कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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