मध्यप्रदेश के सागर जिले के नरयावली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चांदामऊ में हुए चर्चित अग्निकांड मामले में अब दिल्ली स्तर से दखल होने के बाद हड़कंप मच गया है। महीनों से न्याय की गुहार लगा रहे पीड़ित परिवार की सुनवाई जब प्रदेश स्तर पर नहीं हुई, तो राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में हस्तक्षेप किया है। मंगलवार को आयोग की एक विशेष टीम चांदामऊ पहुंची और घटनास्थल का मुआयना कर साक्ष्य जुटाए।
मुख्यमंत्री तक लगाई थी गुहार
गौरतलब है कि 4 दिसंबर की दरम्यानी रात ग्राम चांदामऊ में भीषण आगजनी की घटना हुई थी। इसके बाद से पीड़ित युवती और उसकी मां न्याय के लिए लगातार भटक रही थीं। पीड़ितों ने सागर पुलिस प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव तक अपनी बात रखी, लेकिन आरोप है कि उन्हें अब तक केवल आश्वासन ही मिले।
मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 दिसंबर को दिल्ली में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई थी। आयोग की पीठ ने मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लेते हुए सागर पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया और दो सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया था।
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दिल्ली से पहुंची टीम ने खंगाले सबूत
मंगलवार सुबह लगभग 11 बजे दिल्ली से NHRC के डिप्टी एसपी इसम सिंह और इंस्पेक्टर रामनाथ मानकर अपनी टीम के साथ ग्राम चांदामऊ पहुंचे। टीम सीधे उस जगह पर गई, जहां आगजनी की घटना हुई थी। उन्होंने वहां घटनास्थल का निरीक्षण किया, भौतिक साक्ष्य इकट्ठा किए, पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए, और स्थानीय पुलिस द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की फाइलों को देखा।
तीन दिन तक सागर में रहेगी NHRC टीम
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की यह टीम अगले तीन दिनों तक सागर में रहकर मामले की गहन जांच करेगी। जांच के दौरान यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि पीड़ित परिवार को अब तक न्याय क्यों नहीं मिल पाया और क्या पुलिस जांच में किसी तरह की लापरवाही या कोताही बरती गई है। बताया जा रहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आयोग आगे सख्त निर्देश जारी कर सकता है। इसी आशंका के चलते स्थानीय पुलिस प्रशासन में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।