छिंदवाड़ा में जहरीली कफ सिरप से हुई मासूमों की मौत ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था, लेकिन सीहोर का स्वास्थ्य तंत्र मानो उस दर्दनाक घटना से अछूता रह गया। जिले में आज भी मेडिकल दुकानों पर प्रशिक्षित फार्मासिस्ट नदारद हैं और उनकी जगह अनुभवहीन युवक दवाएं थमा रहे हैं। शासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद इन दुकानों में फार्मासिस्ट की उपस्थिति केवल कागज़ों में दर्ज है। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
लाइसेंस किसी का, दुकान कोई और चला रहा
स्थानीय लोग गौतम शाह, राजू विश्वकर्मा का कहना है कि जिले में बड़ी संख्या में ऐसी दवा दुकानें हैं जिनका लाइसेंस किसी और व्यक्ति के नाम पर है, लेकिन दुकान किसी अन्य द्वारा चलाई जा रही है। दुकानों पर बैठे आठवीं-दसवीं पास नौजवान यह तक नहीं जानते कि कौन-सी दवा किस बीमारी में दी जाती है। पैसे की हवस ने मेडिकल पेशे को व्यवसाय बना डाला है, जहां ज़िम्मेदारी की जगह लालच ने कब्जा कर लिया है।
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डॉक्टरों का अड्डा बन गईं मेडिकल दुकानें
कई दुकानों पर बाहरी डॉक्टर बिना किसी रजिस्ट्रेशन या अनुमति के इलाज कर रहे हैं। न तो उनके पास मरीजों की फाइल होती है, न सही परामर्श। दवा लिखते हैं, फीस लेते हैं और चले जाते हैं। मरीजों को लगता है कि वे डॉक्टर से इलाज करा रहे हैं, जबकि असल में वे एक अवैध प्रणाली के शिकार बन रहे हैं। कई बार गलत दवा से मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है।
ड्रग इंस्पेक्टर की निगरानी पर सवाल
जिले में ड्रग इंस्पेक्टर की नियुक्ति इसीलिए की गई थी ताकि ऐसी लापरवाहियों पर रोक लग सके, लेकिन छिंदवाड़ा की त्रासदी के बाद भी अब तक किसी बड़ी जांच की खबर नहीं आई। दुकानों पर खुलेआम नियमों का उल्लंघन हो रहा है, फिर भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति। लोग सवाल पूछ रहे हैं। क्या किसी और त्रासदी का इंतज़ार है?
ड्रग इंस्पेक्टर किरण मगरे का कहना है कि निरीक्षण समय-समय पर होता रहता है, परंतु वे फिलहाल छिंदवाड़ा की जांच टीम का हिस्सा हैं। उनका कहना है कि जैसे ही समय मिलेगा, जिले की दुकानों की जांच की जाएगी। दूसरी ओर सीएमएचओ डॉ. सुधीर डहेरिया ने कहा कि जांच की जिम्मेदारी ड्रग इंस्पेक्टर की है और उन्हें निर्देश दिए जा चुके हैं। हर 3 महीने में मेडिकल स्टोर की जांच कराई जाती है। दवा विक्रेता संघ के ओम राय ने कहा कि जो भी मेडिकल का अनिमितता हो रही है उस पर शासन कार्रवाई करें।
मरीजों की जान पर सौदेबाज़ी
सीहोर जिले में दवा दुकानों की यह लापरवाही अब किसी आने वाली त्रासदी का संकेत बनती जा रही है। छिंदवाड़ा के बाद भी अगर सबक नहीं लिया गया तो अगली मौतें किसी भी जिले की हो सकती हैं।