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Farmer Accuses Naib Tehsildar of Accepting Bribe; Tehsildar Calls Allegation Baseless
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Tikamgarh News: नायब तहसीलदार पर किसान से रिश्वत लेने का आरोप, नामांतरण के लिए मांगी जा रही थी घूस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़ Published by: टीकमगढ़ ब्यूरो Updated Sun, 10 May 2026 05:53 PM IST
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निवाड़ी जिले के जेरोन क्षेत्र में नामांतरण प्रकरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जेरोन के समरया निवासी बृजेंद्र कुशवाहा ने महिला नायब तहसीलदार वंदना राजपूत पर नामांतरण के नाम पर पैसे लेने का गंभीर आरोप लगाया है। फरियादी ने मामले की शिकायत निवाड़ी कलेक्टर एवं पृथ्वीपुर एसडीएम से करते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है। वहीं नायब तहसीलदार ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खुद को निर्दोष बताया है।
फरियादी बृजेंद्र कुशवाहा का आरोप है कि सुन्नू लाल कुशवाहा के नाम से वसीयतनामा के आधार पर मजल और लुहरगुवा हल्के में स्थित जमीन के नामांतरण के लिए उनसे 25 हजार की राशि ली गई थी। उनका कहना है कि नामांतरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी राजस्व रिकॉर्ड में सुधार नहीं किया गया। जब उन्होंने रिकॉर्ड दुरुस्त कराने की बात कही तो उनसे दोबारा 25 हजार की मांग की गई। फरियादी का आरोप है कि लंबे समय से उन्हें परेशान किया जा रहा है, जिसके बाद उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। बृजेंद्र कुशवाहा ने अपनी शिकायत में कहा है कि राजस्व विभाग में बिना पैसे दिए काम नहीं होने जैसी स्थिति बन गई है। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
वहीं दूसरी ओर जेरोन की नायब तहसीलदार वंदना राजपूत ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि वह फरियादी को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानतीं और न ही वह कभी उनके न्यायालय में आया है। वंदना राजपूत के अनुसार नामांतरण का जो कार्य उनके स्तर का था, वह पूरा कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि संबंधित भूमि दो अलग-अलग हल्कों में दर्ज है, जहां पुराने रिकॉर्ड में त्रुटियां पाई गई हैं। इसी वजह से अमल रिकॉर्ड में सुधार की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। नायब तहसीलदार ने बताया कि दोनों हल्का पटवारियों से प्रतिवेदन मांगे गए हैं और रिपोर्ट एसडीएम कार्यालय को भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड में करीब 20 साल पुरानी त्रुटि सामने आई है, जिसके सुधार के लिए कलेक्टर स्तर से अनुमति आवश्यक होती है। अनुमति मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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