मध्य प्रदेश की धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ओरछा इन दिनों होली के सतरंगी उत्सव में सराबोर है। ऐतिहासिक मंदिरों और भव्य महलों के बीच रंग, गुलाल और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि इस बार होली के उत्सव में देशी पर्यटकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी भी शामिल हुए और भारतीय परंपरा के इस रंगोत्सव का भरपूर आनंद लिया।
विश्व के विभिन्न देशों से आए पर्यटक स्थानीय लोगों के साथ मिलकर होली खेलते नजर आए। इटली से आए एक पर्यटक दल ने कहा कि भारत में होली मनाना उनके लिए यादगार अनुभव है। उन्होंने इस पर्व को एकता, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक बताया। रंगों से सराबोर विदेशी मेहमान ढोल की थाप पर थिरकते दिखे और “होली है” के उत्साहपूर्ण माहौल में पूरी तरह घुल-मिल गए।
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स्थानीय गाइड हेमंत गौर ने विदेशी सैलानियों को होली के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि होली बुराई पर अच्छाई की जीत और सामाजिक सद्भाव का संदेश देती है। गाइड की पहल पर विदेशी मेहमानों ने स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर पारंपरिक अंदाज में गुलाल लगाया और भारतीय व्यंजनों का स्वाद भी चखा।
ओरछा के प्रमुख मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों के आसपास रंगों की बौछार और हंसी-ठिठोली का वातावरण बना रहा। पर्यटक यहां की स्थापत्य कला, शांत बेतवा नदी के तट और धार्मिक आस्था के साथ रंगोत्सव का आनंद लेते दिखाई दिए।
पूरे नगर में सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे उत्सव शांतिपूर्ण और आनंदमय वातावरण में संपन्न हुआ। होली के इस अवसर पर ओरछा ने एक बार फिर ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना को साकार किया। ऐतिहासिक फिजां में घुले रंगों ने न सिर्फ नगर को, बल्कि यहां आए विदेशी मेहमानों के दिलों को भी रंग दिया। यह नजारा भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान को और मजबूत करता नजर आया।