सेवाधाम आश्रम में एक वर्ष में 17 बच्चों की मौत के मामले को हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने स्वतः ही संज्ञान में ले लिया है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला व जस्टिस आलोक अवस्थी ने इस मौत के मामले में माना है कि प्रथमदृष्टया यह मामला बच्चों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा नजर आता है जो कि संविधान के अनुच्छेद 21 के साथ किशोर न्याय अधिनियम 2015 व दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है। इसीलिए इस मामले में जनहित याचिका दर्ज की जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने इस मामले में मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव व आयुक्त, कलेक्टर उज्जैन, पुलिस अधीक्षक उज्जैन, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी एवं सेवाधाम आश्रम के अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब देने को कहा गया है। साथ ही सेवाधाम आश्रम का निरीक्षण कर रिपोर्ट दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद इसकी अगली सुनवाई 12 मार्च 2026 को की जाएगी।
यह है पूरा मामला...
जून-जुलाई 2024 में करीब एक साल पहले 10 बच्चों की मौत के बाद इंदौर के युगपुरुष आश्रम को अचानक बंद कर दिया गया था। यहां के 86 बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट कर दिया गया था। बच्चों को यहां शिफ्ट करने के बाद तो पूरे एक वर्ष किसी ने इस ओर ध्यान नही दिया, लेकिन जिला अस्पताल और विद्युत शवदाह गृह के रिकॉर्ड की पड़ताल से इस बात की चौंकाने वाली जानकारी सामने आई कि इंदौर से भेजे गए 86 बच्चों में से 17 बच्चों की मौत हो चुकी है और सभी की मौत का कारण भी सांस लेने में तकलीफ बताया गया था।
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34 लड़के और 52 लड़कियों को भेजा गया था
राज्य सरकार के निर्देश पर इंदौर के युगपुरुष आश्रम को बंद किया गया था। इसकी वजह थी कि जून-जुलाई 2024 में आश्रम में हैजे से 10 बच्चों की मौत हो गई थी। सरकार की जांच में सामने आया था कि आश्रम ने सिर्फ पांच मौतों की सूचना दी, जबकि पांच बच्चों के शव बिना पोस्टमार्टम परिजनों को सौंप दिए गए थे। युगपुरुष आश्रम बंद होने के बाद वहां रह रहे 86 विशेष बच्चों (34 लड़के और 52 लड़कियां) को उज्जैन भेजा गया। इनकी उम्र 5 से 23 वर्ष के बीच थी। शिफ्टिंग के एक माह में ही यानी 23 जनवरी 2025 से मौतों का सिलसिला शुरू हो गया था।
इंदौर के आश्रम के इन बच्चों की गई अब तक जान
उज्जैन के इलेक्ट्रिक शवदाह गृह के रिकॉर्ड में दर्ज नामों से पुष्टि होती है कि 17 की मृत्यु हो चुकी है। इन नामों में सुहानी (18) की मौत 23 जनवरी 2025, कविशा (8) की मौत 18 फरवरी 2025, विनीता (18) की मौत 11 मार्च 2025, किरण (19) की मौत 13 अप्रैल 2025, हिमानी (13) की मौत 6 मई 2025, बबलू (7) की मौत 28 जून 2025, संदेश (10) की मौत 23 जुलाई 2025, ध्वनि पारुल (12) की मौत 6 अगस्त 2025, पार्वती (20) की मौत 14 सितंबर 2025, कार्तिक (7) की मौत 16 अक्टूबर 2025, कुमकुम (18) की मौत 26 अक्टूबर 2025, स्वर्णा (12) की मौत 11 नवंबर 2025, छोटू उर्फ अटल (18) की मौत 20 नवंबर 2025, कृष्णा साहू (19) की मौत 7 दिसंबर 2025, निहारिका (19) की मौत 24 दिसंबर 2025, पवन (16) की मौत 27 दिसंबर 2025, खुशी (17) की मौत 13 जनवरी 2026 को हुई है।
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गोयल बोले - गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे बच्चे
सेवाधाम आश्रम के संचालक सुधीर गोयल का कहना है कि यहां लाए गए बच्चों की स्थिति पहले से खराब थी। अधिकांश बच्चे बहुदिव्यांग, मिर्गी, टीबी, संक्रमण और अन्य गंभीर रोगों से पीड़ित थे। जिनकी मृत्यु के बाद संबंधित थाने को सूचना देकर पोस्टमार्टम कराया जाता है और बिना पोस्टमार्टम अंतिम संस्कार नहीं होता।
यह बोले जिम्मेदार
सेवाधाम का जो प्रकरण सामने आया है। उसमें संचालनालय महिला बाल विकास के निर्देशानुसार सुधारात्मक कार्रवाई की जा रही है। संचालनालय महिला बाल विकास विभाग के निर्देशानुसार इंटरनल जो विभागीय समिति बनाई गई है वह जांच कर कार्रवाई कर रही है। माननीय हाईकोर्ट के आदेशों के तहत संचालनालय से जो निर्देश दिए गए हैं, उस समय अवधि में यह प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया जाएगा। सेवाधाम आश्रम में मेडिकल, महिला बाल विकास विभाग के साथ ही सामाजिक न्याय और प्रशासन की टीम लगातार कार्यवाही कर रही है जो निर्देश प्राप्त हुए हैं उसके तहत ही कार्रवाई की जा रही है।
- ब्रजेश त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग