भीषण जल संकट के दौरान शहरवासियों को पेयजल के लिए परेशान न होना पड़े इसीलिए उज्जैन के पूर्व कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने गंभीर नदी के जल को संरक्षित घोषित किया था, लेकिन इन नियमों का गंभीर डैम पर कितनी सख्ती से पालन करवाया जा रहा है। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले चार महीने से एक युवक लगातार सीएम हेल्पलाइन और पीएचई के अधिकारियों को इस बात की शिकायत कर रहा है कि गंभीर नदी के पानी को लगातार मोटर लगाकर चोरी किया जा रहा है, लेकिन इस शिकायत के बावजूद भी जिम्मेदार इस और कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि वर्तमान में भी डैम से संरक्षित जल की चोरी हो रही है।
बताया जाता है कि नीरज चौहान ग्राम पंचायत नाहरखेड़ी ने दिनांक 14/01/2025 को सीएम हेल्प लाइन पर शिकायत क्रमांक 30555629 दर्ज कराई गई थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि पीएचई के जिम्मेदारों को लगातार शिकायत की थी कि ग्राम नाहरखेड़ी में से गंभीर नदी का पानी गांव के लोगों द्वारा अवैध रूप से मोटर डालकर निकाला जा रहा है और खेती की जा रही है, जिससे शहर में जल संकट के साथ ही ग्रामीण लोगों को पानी पीने के पानी की समस्या हो जाएगी। नीरज चौहान के द्वारा चार महीने पहले शिकायत डाली गई थी पर पीएचई विभाग द्वारा अभी तक इस पर ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की हैं जिससे पानी की चोरी रोकी जाए। शिकायत में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि ग्रामीण लोगों को पीने के पानी के लिए बहुत समस्या हो रही है।
अभी भी 10 से 15 मोटर डली हुई है
भीषण गर्मी में जल संकट न आए इसलिए गंभीर नदी का पानी रिजर्व किया गया है। पीएचई विभाग ने अपनी तरफ से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। आरोप है कि विभाग के कुछ लोग ग्रामीणों से मिले हुए हैं, जिससे कि समय-समय पर जानकारी देते रहते हैं। यह लोग गंभीर नदी में मोटर चलने के एवज में पैसे का लेना-देना करते हैं, जिससे उनके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं होती है।
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शिकायतकर्ता के पास है पानी चोरी के फोटो वीडियो
शिकायतकर्ता ने बताया कि सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने के साथ ही समय-समय पर पीएचई के अधिकारियों को वीडियो फोटो डालता रहा पर इन लोगों ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। 14 जनवरी से लगाकर आज दिनांक तक के वीडियो और फोटो मेरे पास उपलब्ध है।
इस धारा के तहत हो सकती है कार्रवाई
उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि उज्जैन में गंभीर डैम और क्षिप्रा नदी के जल को घरेलू उपयोग के लिए संरक्षित घोषित कर दिया था, जोकि पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा तीन के अनुसार है। यह फैसला उज्जैन के तत्कालीन कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी नीरज कुमार सिंह ने लिया था। कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी नीरज कुमार सिंह ने गंभीर डैम और क्षिप्रा नदी के जल को घरेलू प्रयोजन के लिए संरक्षित घोषित किया था। यह निर्णय पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा तीन के अनुसार लिया गया, जिसका उद्देश्य आम जनता को घरेलू उपयोग के लिए पानी उपलब्ध कराना है। यह मामला अत्यंत गंभीर है। आपके माध्यम से यह मेरे संज्ञान में आया है। मैं जल्द ही इस पर कार्रवाई करवाता हूं।
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इन गांव में हो रहा गंभीर दम का जल चोरी
शिकायतकर्ता नीरज चौहान का कहना है कि ग्राम नाहरखेड़ी जो की ग्राम चिकली के पास है और बड़नगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। उसके साथ ही ग्राम खेमासा, ब्राह्मण बड़ौदा, नलवा, मुंडवासा और अन्य गांव में डैम का यह संरक्षित जल पीएचई विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ही चोरी हो रहा है। पानी की इस चोरी को रोकने के लिए अगर कार्रवाई की भी जाती है तो विभाग के ही कुछ लोग ग्रामीणों को सतर्क कर देते हैं, जिससे यह लोग एक-दो दिनों के लिए अपनी मोटर को हटा देते हैं और बाद में फिर पेयजल चोरी होने लगता है।