होली जैसे पारंपरिक पर्व पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से विदिशा नगर पालिका ने इस वर्ष एक सराहनीय और अनोखी पहल की है। होली दहन में बड़ी मात्रा में लकड़ियों के उपयोग से जंगलों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए नगर पालिका ने गोबर से बनी लकड़ियों और कंडों की व्यवस्था की है। इनका विक्रय मात्र 5 रुपये प्रति किलो की दर से किया जा रहा है, ताकि आम नागरिक आसानी से इन्हें खरीदकर पर्यावरण हितैषी होली मना सकें।
नगर पालिका द्वारा यह व्यवस्था पुरानी नगर पालिका परिसर के पास की गई है। जिले की विभिन्न गौशालाओं से गोबर से निर्मित लकड़ियां और कंडे मंगाए गए हैं। इन उत्पादों को स्थानीय स्तर पर तैयार किया गया है, जिससे गौशालाओं को भी आर्थिक सहयोग मिल रहा है और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम उठाया जा रहा है।
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ज्ञात हो कि होली के अवसर पर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में लकड़ियां जलाई जाती हैं। इसके चलते हर वर्ष हजारों पेड़ों की कटाई होती है, जिससे पर्यावरण संतुलन प्रभावित होता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए नगर पालिका ने इस बार वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्णय लिया। गोबर से बनी लकड़ियां न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि जलने पर कम धुआं भी उत्पन्न करती हैं और प्रदूषण को कम करने में सहायक होती हैं।
इस संबंध में विदिशा नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) दुर्गेश ठाकुर ने बताया कि नगर पालिका का उद्देश्य होली के पर्व को पारंपरिक उल्लास के साथ मनाते हुए प्रकृति की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि गोबर से बने कंडे और लकड़ियां 5 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पहल से जुड़ सकें। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे इस पर्यावरण हितैषी प्रयास का समर्थन करें और लकड़ी की बजाय गोबर उत्पादों का उपयोग करें।
स्थानीय नागरिकों ने भी नगर पालिका की इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि यदि इस प्रकार की पहल निरंतर जारी रही तो भविष्य में जंगलों की अंधाधुंध कटाई पर रोक लगाई जा सकेगी। साथ ही, गौशालाओं को भी आर्थिक मजबूती मिलेगी। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया यह कदम न केवल जागरूकता बढ़ाएगा, बल्कि समाज को यह संदेश भी देगा कि परंपराओं को निभाते हुए भी प्रकृति की रक्षा की जा सकती है। विदिशा नगर पालिका की यह पहल अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकती है।