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Farmers to stage a sit-in outside the Patiala SSP's office on May 14; Sarwan Pandher provides the information.
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14 मई को पटियाला एसएसपी दफ्तर के बाहर किसान देंगे धरना, सरवण पंधेर ने दी जानकारी
किसान नेता सरवण सिंह पंधेर ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के हालिया बयानों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि डीजल, पेट्रोल और खादों के इस्तेमाल को कम करने संबंधी बयान सरकार की विफल विदेश नीति को छिपाने की कोशिश हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार “देश हित” के नाम पर लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर रही है, जबकि देश इस समय गंभीर आर्थिक और कृषि संकट का सामना कर रहा है।
पंधेर ने कहा कि पिछले चार महीनों से डीजल, पेट्रोल और खादों को लेकर जो हालात बने हुए हैं, वे सरकार की गलत नीतियों का परिणाम हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत के पास रूस से सस्ता तेल और खाद लेने का विकल्प था, लेकिन अमेरिका के दबाव में केंद्र सरकार ने अलग फैसले लिए, जिसके चलते आज देश संकट की स्थिति में पहुंच गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार को पहले से संकट का अंदेशा था तो तेल और खादों का पर्याप्त भंडारण क्यों नहीं किया गया।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय देश में अनाज की कमी के दौरान “जय जवान, जय किसान” का नारा देकर किसानों को अधिक उत्पादन के लिए खाद और दवाइयों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया था। कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में भी इनका उपयोग शामिल किया गया। अब यदि केंद्र सरकार खादों के उपयोग को कम करने की बात कर रही है तो लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि पहले की नीति गलत थी या मौजूदा सरकार गलत दिशा में जा रही है।
किसान नेता ने आशंका जताई कि आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और खादों की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले से ही “देश हित” का भावनात्मक कार्ड खेलकर लोगों को मानसिक रूप से तैयार करने में लगी हुई है। पंधेर ने आरोप लगाया कि सरकार की कमजोर विदेश नीति और आर्थिक योजना की कमी का बोझ आम जनता को महंगाई के रूप में उठाना पड़ेगा।
उन्होंने कोविड-19 के दौरान लागू की गई नीतियों पर भी सवाल उठाए और कहा कि भविष्य में नए वायरसों के नाम पर फिर से पाबंदियां लगाने की तैयारी हो सकती है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने की अपील की।
पंधेर ने आरोप लगाया कि पंजाब में किसानों और पत्रकारों के साथ धक्केशाही की जा रही है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां मुख्यमंत्री के कार्यक्रम होंगे, वहां किसान शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचकर अपने सवाल पूछेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गिरफ्तार किसानों को तुरंत रिहा नहीं किया गया तो 14 मई को पटियाला में SSP कार्यालय के बाहर बड़ा धरना दिया जाएगा।
इसके अलावा 12 मई को सहकारी समितियों और बैंकों के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। किसान नेताओं ने मांग की कि किसानों के कर्ज की सीमा बढ़ाई जाए, वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना लागू की जाए और नए ग्राहकों को भी सुविधाएं दी जाएं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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