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बैसाखी और खालसा साजना दिवस के पावन अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने संगत को बधाई देते हुए अहम संदेश दिया। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने तख्त श्री केसगढ़ साहिब की पवित्र धरती पर विशाल दीवान सजाकर खालसा पंथ की स्थापना की थी।
उन्होंने कहा कि उस समय लगभग 80 हजार संगत एकत्रित हुई थी, जहां गुरु साहिब ने पंच प्यारे सजाकर खालसा पंथ को प्रकट किया। भाई दया सिंह जी, भाई धर्म सिंह जी सहित विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों से आए गुरसिखों ने अपने शीश अर्पित कर सिख इतिहास में अनोखी मिसाल कायम की।
ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि गुरु साहिब ने चरण पाहुल की मर्यादा को बदलकर खंडे बाटे की पाहुल की परंपरा शुरू की और सिखों को रहित मर्यादा, ककार और संस्कार प्रदान किए। उन्होंने गुरु साहिब के वचन “खालसा मेरो रूप है खास” को याद करते हुए कहा कि खालसा केवल एक कौम नहीं, बल्कि गुरु का स्वरूप है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में खालसा पंथ के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान केवल एकता और गुरबाणी के मार्ग पर चलकर ही संभव है।
अंत में उन्होंने विश्वभर में रह रही संगत को बैसाखी और खालसा साजना दिवस की बधाई देते हुए अरदास की कि सतगुरु खालसा पंथ पर अपनी कृपा बनाए रखें और सदा चढ़दी कला बख्शें।
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