{"_id":"6a575c9860c6bf3c320725d4","slug":"lawrence-bishnoi-extradition-will-lawrence-be-extradited-to-the-us-learn-about-the-legal-process-in-india-2026-07-15","type":"video","status":"publish","title_hn":"Lawrence Bishnoi Extradition: क्या अमेरिका को सौंपा जाएगा लॉरेंस बिश्नोई? जानिए भारत में क्या है कानूनी प्रक्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lawrence Bishnoi Extradition: क्या अमेरिका को सौंपा जाएगा लॉरेंस बिश्नोई? जानिए भारत में क्या है कानूनी प्रक्र
Video Desk Amar Ujala Dot Com Published by: Chandra Prakash Neeraj Updated Wed, 15 Jul 2026 03:41 PM IST
Link Copied
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, पंजाब पुलिस के एसएचओ गुरिंदरजीत सिंह नागरा और अन्य लोगों पर संगठित अपराध, हत्या की साजिश, रंगदारी और आपराधिक रैकेट चलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद उनके संभावित प्रत्यर्पण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अमेरिकी अदालत में आरोप तय होने से प्रत्यर्पण स्वत: नहीं हो जाता। इसके लिए भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि और भारतीय कानून के तहत पूरी प्रक्रिया अपनानी होगी। एडवोकेट राजेश वर्मा के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच 1997 की द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि लागू है। इसका सबसे अहम सिद्धांत डुअल क्रिमिनैलिटी है। यानी जिस अपराध के आधार पर प्रत्यर्पण मांगा जाए वह दोनों देशों में दंडनीय होना चाहिए और उसके लिए कम से कम एक वर्ष की सजा का प्रावधान होना चाहिए।हत्या, आपराधिक साजिश, रंगदारी, मादक पदार्थों की तस्करी और हथियारों से जुड़े अपराध भारत में भी गंभीर अपराध हैं। इसलिए सिद्धांत रूप से अमेरिका के आरोप प्रत्यर्पण का आधार बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका यदि औपचारिक अनुरोध भेजता है तो वह पहले विदेश मंत्रालय के पास पहुंचेगा। इसके बाद गृह मंत्रालय और संबंधित जांच एजेंसियां यह जांच करेंगी कि अनुरोध भारत-अमेरिका संधि और प्रत्यर्पण अधिनियम 1962 के अनुरूप है या नहीं।प्रारंभिक जांच के बाद मामला अदालत जाएगा जहां कानूनी शर्तों की पड़ताल होगी। अदालत की राय के बाद भी अंतिम निर्णय केंद्र सरकार ही लेगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त शर्तें या राजनयिक आश्वासन भी मांग सकती है। एडवोकेट वर्मा के अनुसार लॉरेंस बिश्नोई का मामला सबसे अलग है क्योंकि वह पहले से भारत की न्यायिक हिरासत में है और उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में हत्या, रंगदारी और संगठित अपराध के कई मामले लंबित हैं। प्रत्यर्पण अधिनियम 1962 के तहत भारत सरकार को यह अधिकार है कि यदि किसी आरोपी के खिलाफ देश में मुकदमे लंबित हों या उसे सजा भुगतनी हो तो उसका प्रत्यर्पण टाला जा सकता है। ऐसे में भारत पहले घरेलू मुकदमों का निपटारा कर सकता है।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।