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Punjab: राकेश कुमार का दावा, ऊधम सिंह से जुड़े प्रचलित इतिहास पर नए खुलासे
Video Desk Amar Ujala Dot Com Published by: Chandra Prakash Neeraj Updated Mon, 06 Jul 2026 03:19 PM IST
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शहीद ऊधम सिंह के जीवन से जुड़े कई प्रचलित तथ्यों को चुनौती देने वाले नए दावे सामने आए हैं। लेखक एवं शोधकर्ता राकेश कुमार ने अपनी नई पुस्तक 'ऊधम सिंह भारत दी आजादी लई फांसी चढ़िया' में उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे तथ्यों का उल्लेख किया है, जिन्हें उन्होंने वर्षों के शोध का परिणाम बताया है।
राकेश कुमार का दावा है कि अपने शोध के दौरान उन्हें शहीद ऊधम सिंह के 18 अलग-अलग नामों का उल्लेख मिला। उनका कहना है कि ऊधम सिंह के जीवन से जुड़ी कई प्रचलित धारणाएं उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों से मेल नहीं खातीं। लेखक के अनुसार, उनका सबसे बड़ा दावा यह है कि 13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड के समय ऊधम सिंह वहां मौजूद नहीं थे। उनका कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार ऊधम सिंह जून 1919 में भारत पहुंचे थे। ऐसे में जलियांवाला बाग में उनकी मौजूदगी संबंधी प्रचलित धारणा ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खाती। राकेश कुमार ने अपनी पुस्तक में यह भी दावा किया है कि लंदन के कैक्सटन हॉल में ऊधम सिंह ने केवल माइकल ओ'ड्वायर पर ही नहीं, बल्कि भारत में रह चुके चार पूर्व गवर्नरों पर कुल छह गोलियां चलाई थीं। उनके अनुसार, इस घटना में माइकल ओ'ड्वायर की मृत्यु हुई, जबकि अन्य तीन अधिकारी घायल हो गए थे। लेखक का यह भी कहना है कि ऊधम सिंह ने पिस्तौल किसी पुस्तक में छिपाकर नहीं, बल्कि अपनी जैकेट की जेब में रखकर कैक्सटन हॉल में प्रवेश किया था। पुस्तक में यह भी उल्लेख किया गया है कि ऊधम सिंह ने कभी भी अपना नाम 'राम मोहम्मद सिंह आजाद' नहीं रखा था, बल्कि उन्होंने 'मोहम्मद सिंह आजाद' नाम का इस्तेमाल किया था। इसी तरह लेखक का दावा है कि ऊधम सिंह ने अदालत में वारिस शाह की प्रसिद्ध रचना 'हीर' को हाथ में लेकर शपथ नहीं ली थी। साथ ही, पुस्तक के अनुसार उनका किसी महिला से विवाह भी नहीं हुआ था। राकेश कुमार के मुताबिक, ऊधम सिंह शहीद-ए-आजम भगत सिंह को अपना गुरु मानते थे और उनके विचारों से गहराई से प्रभावित थे। उनका गदर पार्टी, 'जुग पलटाओ' संगठन तथा इंकलाबी पार्टी, गुरदासपुर से भी संपर्क था। लेखक का कहना है कि ऊधम सिंह भारत में गदर साहित्य प्रकाशित कर स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत करना चाहते थे। वे ब्रिटिश साम्राज्य की लूट-खसोट और अत्याचारों के विरोधी थे तथा देश की आजादी के लिए समर्पित थे। राकेश कुमार का कहना है कि उनकी पुस्तक में इन दावों के अलावा भी कई नए ऐतिहासिक दस्तावेजों और शोध आधारित जानकारियों को शामिल किया गया है, जिनका उद्देश्य शहीद ऊधम सिंह के जीवन के नए पहलुओं को सामने लाना है। लेखक अब तक 19 पुस्तकें लिख चुके हैं। उनकी चार पुस्तकों को भाषा विभाग, पंजाब द्वारा सर्वोत्तम पुस्तक का पुरस्कार भी मिल चुका है।
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