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Shravan Singh's Life Transformed After 'Operation Sindoor'; Principal Says: "Other Children Are Also Getting Inspired."
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ऑपरेशन सिन्दूर के बाद बदल गई श्रवण सिंह की जिंदगी, प्रिंसिपल बोलीं-बाकी बच्चे भी हो रहे प्रेरित
फिरोजपुर के ब्लाक ममदोट के गांव तरांवाली में ऑपरेशन सिन्दूर के बाद दस वर्षीय श्रवण सिंह की पूरी जिंदगी बदल गई है। भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान सरहद पर बंकरों में बैठे सैनिकों को घर से चाय, लस्सी व दूध देने श्रवण जाता था। युद्ध विराम के बाद सेना ने उसकी बहादुरी को देख उसे गोद लेकर उसकी पढ़ाई लिखाई से लेकर उसके इलाज तक का खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली है।
श्रवण गांव तरांवाली के सरकारी स्कूल में पढ़ता था और उसका रहन-सहन बिल्कुल गांव जैसा था। लेकिन आपरेशन सिन्दूर के बाद से श्रवण की जिंदगी में खुशहाली आ गई। श्रवण की बहादुरी देख राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने अवार्ड दिया है। यही नहीं फिल्मी अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने भी श्रवण को सम्मानित किया है। इसके अलावा फिरोजपुर के एक निजी अस्पताल ने श्रवण ही नहीं उसके पूरे परिवार का मुफ्त इलाज की करने की जिम्मेदारी ली है।
उधर, सिटी हार्ट स्कूल की प्रिंसिपल रजनी शर्मा ने कहा कि श्रवण का उनके स्कूल में पढ़ने से अन्य बच्चें भी इसी की तरह बहादुर बनना चाहते हैं। उसे कई समाजसेवी संस्थाओं ने भी सम्मानित किया है। उनका स्कूल श्रवण को हर प्रकार की सुविधा प्रदान कर रहा है। श्रवण उनके स्कूल का स्टार हैं। क्लास टीचर ज्योति ने कहा कि पढ़ने में श्रवण बहुत अच्छा है। हार्डवर्किंग करता है। स्कूल के बच्चें भी इससे काफी प्रभावित हो रहे हैं।
उधर, श्रवण के पिता सोना सिंह ने कहा कि श्रवण की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। उसका बेटा बड़ा होकर सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहता है। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान बच्चें डर से अपनी मां की गोद में छिप रहे थे। उनका बेटा सरहद पर तैनात सैनिकों की खानपान की सेवा कर रहा था। इसी सेवा ने उसकी जिंदगी बदल दी है।
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