अजमेर शहर के जनाना अस्पताल में डिलीवरी के बाद एक महिला की मौत ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया है कि समय पर इलाज न मिलने और डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही के कारण महिला की जान गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर और जेएलएन अस्पताल में आक्रोश का माहौल देखने को मिला।
डिलीवरी के बाद बिगड़ी तबीयत
कोटड़ा बैरवा बस्ती निवासी त्रिलोक बेरवा ने बताया कि उनकी पत्नी पूजा बेरवा (30) को 16 सितंबर को जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन ऑपरेशन से बेटे का जन्म हुआ। डिलीवरी के तुरंत बाद पूजा को तेज ब्लीडिंग शुरू हो गई। त्रिलोक का आरोप है कि उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर संध्या चौधरी और नर्सिंग स्टाफ को बार-बार सूचित किया, लेकिन तत्काल कदम नहीं उठाए गए।
दोबारा हुआ ऑपरेशन, फिर भी नहीं बची जान
परिजनों ने बताया कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने एक खाली कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए। 18 सितंबर को दूसरा ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद पूजा की हालत और बिगड़ गई। गंभीर स्थिति में उसे जेएलएन अस्पताल रेफर किया गया। यहां कई दिनों तक इलाज चला, लेकिन 26 सितंबर को उसने दम तोड़ दिया।
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नवजात शिशु भी आईसीयू में भर्ती
परिवार का कहना है कि अगर जनाना अस्पताल में समय रहते सही इलाज किया जाता, तो पूजा की जान बचाई जा सकती थी। मृतका का नवजात शिशु भी गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती है। मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में परिजन और समाज के लोग जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी पर एकत्र हो गए और हंगामा करते हुए डॉक्टरों और स्टाफ पर कार्रवाई की मांग की।
पुलिस जांच में जुटी
क्रिश्चियन गंज थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मृतका के पति की शिकायत पर कार्रवाई शुरू कर दी है। एएसआई सूरज कुमार ने बताया कि पति ने डॉक्टर और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया है। पोस्टमॉर्टम के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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