अलवर जिले में कांग्रेस पार्टी के भीतर आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष योगेश मिश्रा ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पार्टी के पूर्व सभापति और हालिया विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रत्याशी रहे अजय अग्रवाल को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह वर्षों के लिए कांग्रेस से निष्कासित कर दिया है। इस निष्कासन ने न सिर्फ स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और रंजिश को भी उजागर कर दिया है।
विधानसभा टिकट से उपजा विवाद बना कारण?
बताया जा रहा है कि यह विवाद नई जड़ नहीं है। विधानसभा चुनाव के समय ही दोनों नेताओं के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी। जिला अध्यक्ष योगेश मिश्रा स्वयं अलवर से टिकट चाहते थे, लेकिन पार्टी ने टिकट अजय अग्रवाल को दे दिया। उसी समय से दोनों के बीच खटास गहराती गई, जो अब खुलकर सामने आ गई है।
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योगेश मिश्रा की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि अजय अग्रवाल लंबे समय से भाजपा नेताओं के पक्ष में सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे थे, जो पार्टी लाइन के खिलाफ है। इसके चलते उन्हें नोटिस देकर तीन दिन में जवाब मांगा गया था, लेकिन उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। इसके अलावा वे पार्टी के किसी कार्यक्रम में भी भाग नहीं ले रहे थे, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वे पार्टी गतिविधियों से दूरी बना चुके हैं।
'यह बदले की कार्रवाई है'
दूसरी ओर निष्कासन के निर्णय पर अजय अग्रवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से जिला अध्यक्ष की निजी रंजिश का परिणाम है। उन्हें मुझे पार्टी से निष्कासित करने का कोई अधिकार नहीं है। यह अधिकार केवल पार्टी हाईकमान के पास होता है। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि मिश्रा कांग्रेस और भाजपा दोनों के नेताओं के साथ मिलकर भूमि खरीद-फरोख्त जैसे निजी व्यापार में लिप्त हैं। इसी वजह से उन्होंने खुद मिश्रा की कार्यशैली को लेकर पहले भी पार्टी हाईकमान और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से शिकायत की थी। उन्होंने यह भी कहा कि मैं किसी भी व्यक्ति के अच्छे काम का सम्मान करता हूं, चाहे वह मुख्यमंत्री हो या प्रधानमंत्री। इसका मतलब यह नहीं कि मैं पार्टी विरोधी हूं।
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हाईकमान के पाले में गेंद, अंतिम निर्णय प्रतीक्षित
फिलहाल यह मामला प्रदेश कांग्रेस और पार्टी हाईकमान के संज्ञान में पहुंच चुका है। यह देखना बाकी है कि पार्टी नेतृत्व इस मामले को किस नजर से देखता है और क्या अजय अग्रवाल के निष्कासन को मान्यता दी जाएगी या फिर जिला अध्यक्ष के निर्णय को खारिज किया जाएगा।