जैसलमेर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शुक्रवार को अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत जैसलमेर पहुंचे। उनके दौरे का सबसे अनोखा दृश्य तब देखने को मिला जब उन्होंने सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बावजूद किसी बुलेटप्रूफ या लग्जरी वाहन में नहीं, बल्कि साधारण ई-रिक्शा में सवार होकर जैसलमेर किले के भीतर स्थित पार्श्वनाथ जैन मंदिर के लिए रवाना हुए।
ई-रिक्शा से किले के भीतर पहुंचे डॉ. भागवत सीधे मंदिर के मुख्य द्वार से प्रवेश कर “मूल गम्भारा” यानी गर्भगृह में पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन किए और देश की समृद्धि व खुशहाली की प्रार्थना की। दर्शन के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार का भी अवलोकन किया। यह स्थान जैन धर्म की प्राचीन पांडुलिपियों और धार्मिक धरोहरों के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
871 साल पुरानी पावन चादर के दर्शन
ज्ञान भंडार में संघ प्रमुख ने जैन धर्म के पूज्य दादा गुरुदेव आचार्य जिनदत्त सूरी से जुड़ी 871 वर्ष पुरानी पावन चादर के दर्शन भी किए। मान्यता है कि 11वीं शताब्दी में आचार्य जिनदत्त सूरी के अग्नि संस्कार के समय यह चादर अग्नि में भी नहीं जली थी। करीब 871 वर्षों बाद इसका विधिवत अभिषेक और सार्वजनिक दर्शन आयोजित किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर में देशभर से बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु जैसलमेर पहुंचे हैं।
ट्रस्ट ने किया सम्मान
पार्श्वनाथ जैन मंदिर परिसर में दर्शन के बाद श्री जैसलमेर लोद्रवपुर पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर ट्रस्ट की ओर से डॉ. भागवत का पारंपरिक तरीके से सम्मान किया गया। ट्रस्ट पदाधिकारियों ने उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किया और संघ प्रमुख ने मंदिर की विजिटर बुक में अपने विचार भी दर्ज किए।
ई-रिक्शा से वापस दशहरा चौक
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद डॉ. भागवत पुनः ई-रिक्शा से किले की गलियों से होते हुए दशहरा चौक पहुंचे। वहां से उनका काफिला आगे के कार्यक्रम के लिए देदांसर मेला ग्राउंड की ओर रवाना हुआ, जहां तीन दिवसीय ऐतिहासिक चादर महोत्सव का मुख्य आयोजन हो रहा है।
महोत्सव में होगा ऐतिहासिक सामूहिक पाठ
जैसलमेर में आयोजित यह तीन दिवसीय चादर महोत्सव जैन समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आयोजन के तहत 7 मार्च को विश्वभर में एक साथ 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालुओं द्वारा ‘दादागुरु इकतीसा’ का सामूहिक पाठ किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार यह एक अनोखा धार्मिक आयोजन है और विश्व रिकॉर्ड भी बन सकता है।
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स्मारक सिक्का और डाक टिकट का विमोचन
इस अवसर पर संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत द्वारा दादा गुरुदेव की स्मृति में विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट का विमोचन किया जाएगा। साथ ही “दादा गुरुदेव” पर आधारित विशेष पुस्तक का लोकार्पण भी प्रस्तावित है।
बड़ी संख्या में पहुंचे साधु-संत और श्रद्धालु
महोत्सव में देशभर से करीब 400 जैन संत और साध्वी और 20 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हैं। प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्थाएं की हैं, और किले व कार्यक्रम स्थल पर पुलिस बल तैनात किया गया है। तीन दिवसीय यह ऐतिहासिक चादर महोत्सव 8 मार्च को भव्य समापन समारोह के साथ संपन्न होगा।