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Jaisalmer News: सोनार किले में RSS प्रमुख करेंगे भव्य महोत्सव का शुभारंभ, 871 साल बाद पवित्र चादर का अभिषेक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर Published by: जैसलमेर ब्यूरो Updated Thu, 05 Mar 2026 11:22 PM IST
ऐतिहासिक सोनार किले की नगरी जैसलमेर में 6 से 8 मार्च तक जैन समाज का अत्यंत महत्वपूर्ण और भव्य चादर महोत्सव आयोजित होने जा रहा है। तीन दिवसीय इस धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन में देश-विदेश से हजारों जैन संत, साध्वी और श्रद्धालु भाग लेंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ 6 मार्च को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत करेंगे। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में उपस्थित होकर वे श्रद्धालुओं को संबोधित करेंगे।
महोत्सव का आयोजन दादा गुरुदेव श्री जिनदत्त सूरी चादर महोत्सव समिति के तत्वावधान में किया जा रहा है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा संस्थान, विद्या भारती सहित कई सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे। यह आयोजन गच्छाधिपति आचार्य जिनमणिप्रभा सूरी जी की पावन निश्रा में संपन्न होगा, जबकि इसकी प्रेरणा आचार्य जिनमनोजना सागर जी महाराज से प्राप्त हुई है।
7 मार्च को श्रद्धालुओं का सामूहिक पाठ
इस तीन दिवसीय महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण 7 मार्च को होने वाला ऐतिहासिक सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ होगा। इस दिन विश्वभर में एक ही समय पर लगभग 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालु दादागुरु इकतीसा का पाठ करेंगे।
आयोजकों के अनुसार यह आध्यात्मिक एकता और वैश्विक आस्था का अनूठा उदाहरण होगा, जिसमें भारत सहित कई देशों में स्थित जैन मंदिरों, दादाबाड़ियों और धार्मिक संस्थानों में एक साथ पाठ किया जाएगा।
विश्व हिंदू परिषद के हजारों सत्संग केंद्रों, देशभर की दादाबाड़ियों, विद्या भारती के सैकड़ों विद्यालयों और अनेक मंदिरों में भी श्रद्धालु सामूहिक रूप से इस पाठ में शामिल होंगे। आयोजन समिति के अनुसार इस महासंकल्प का उद्देश्य विश्वभर में आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार करना है।
871 वर्षों बाद होगा चादर का अभिषेक
महोत्सव की एक और विशेषता यह है कि दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि की पवित्र चादर का 871 वर्षों बाद पहली बार विधिवत अभिषेक किया जाएगा। इससे पहले जैसलमेर किले से भव्य वरघोड़ा निकाला जाएगा, जिसमें हाथी, घोड़े, पालकी और धार्मिक झांकियां शामिल होंगी। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में यह चादर शोभायात्रा के रूप में महोत्सव स्थल तक लाई जाएगी।
दादागुरु जिनदत्तसूरि की ऐतिहासिक परंपरा
जैन परंपरा के अनुसार प्रथम दादागुरु आचार्य जिनदत्त सूरी जी 11वीं शताब्दी के महान आध्यात्मिक आचार्य माने जाते हैं। विक्रम संवत 1211 में अजमेर में उनके देवलोक गमन के बाद जब उनका अंतिम संस्कार किया गया तो एक चमत्कारी घटना सामने आई। बताया जाता है कि उनके शरीर के साथ रखे गए वस्त्र अग्नि में पूरी तरह नहीं जले और सुरक्षित रह गए।
बाद में ये पवित्र वस्त्र गुजरात के पाटन स्थित खरतरगच्छ ज्ञान मंदिर में रखे गए। लगभग 145 वर्ष पहले जैसलमेर में महामारी फैलने पर तत्कालीन महारावल ने इन वस्त्रों को जैसलमेर मंगवाया था। मान्यता है कि इनके आगमन के बाद महामारी शांत हो गई। वर्तमान में यह ऐतिहासिक चादर जैसलमेर के सोनार दुर्ग स्थित जैन मंदिर के ज्ञान भंडार में सुरक्षित रखी हुई है और श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बनी हुई है।
तीन दिनों तक होंगे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम
आयोजन समिति के अनुसार 6 से 8 मार्च तक होने वाले तीनों दिनों के इस आयोजन में कई धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पहले दिन 6 मार्च को गुरु भगवंतों का मंगल प्रवेश, नगरियों का उद्घाटन और विशाल धर्मसभा होगी। इसी अवसर पर चादर महोत्सव से जुड़ा विशेष सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया जाएगा। शाम को दादा गुरुदेव के जीवन पर आधारित एक भव्य नाट्य प्रस्तुति का मंचन किया जाएगा।
दूसरे दिन 7 मार्च को जैसलमेर किले से चादर का भव्य वरघोड़ा निकलेगा। इसके बाद वैश्विक स्तर पर सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ होगा। दोपहर में चादर का महाअभिषेक और पूजा संपन्न होगी। शाम को सांस्कृतिक संध्या के दौरान प्रसिद्ध कलाकार भक्ति संगीत की प्रस्तुतियां देंगे।
तीसरे दिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ उपाध्याय महेन्द्रसागर महाराज को आचार्य पद प्रदान किया जाएगा और गणिनी पद समारोह भी आयोजित होगा। इसी दिन चादर अभिषेक से प्राप्त जल और वासक्षेप श्रद्धालुओं में वितरित किए जाएंगे।
राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी भी होगी आयोजित
महोत्सव के दौरान 7 और 8 मार्च को भारत की सांस्कृतिक एकात्मता, सामाजिक सद्भाव और समरसता में दादागुरु परंपरा का योगदान विषय पर राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी भी आयोजित की जाएगी। इसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के विद्वान, जैन आचार्य, साधु-साध्वी और धर्म विशेषज्ञ भाग लेंगे।
आयोजन समिति के अनुसार इस महोत्सव में देशभर से लगभग 400 संतों की उपस्थिति रहेगी और हजारों श्रद्धालु तीन दिनों तक जैसलमेर में मौजूद रहेंगे। बड़ी संख्या में जैन मुनि और साध्वियां पैदल यात्रा करते हुए जैसलमेर पहुंच रहे हैं।
समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आस्था, एकता और आध्यात्मिक जागरण का वैश्विक संदेश देने वाला महाअभियान है।
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