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Jalore News: Leopard terror in Kotada, attacked on two villagers in 20 minutes, rescue happened in 9 hours
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Jalore News: कोटड़ा में तेंदुए का आतंक, 20 मिनट में दो ग्रामीणों पर हमला कर घायल किया, 9 घंटे में हुआ रेस्क्यू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौर Published by: जालौर ब्यूरो Updated Tue, 25 Mar 2025 10:02 AM IST
जिले के आहोर के कोटड़ा गांव में सोमवार सुबह एक तेंदुए (लेपर्ड) के हमले से दहशत फैल गई। इस खूंखार जानवर ने महज 20 मिनट के भीतर दो ग्रामीणों पर हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने सतर्कता दिखाते हुए तेंदुए को एक कमरे में बंद कर दिया और वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद जोधपुर से आई रेस्क्यू टीम ने 9 घंटे के ऑपरेशन के बाद तेंदुए को ट्रैंकुलाइज कर पिंजरे में डाल दिया।
लेपर्ड का पहला हमला तब हुआ जब सुबह 8 बजे 63 वर्षीय चेलाराम सरगरा अपने खेत में अरंडी की फसल की निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान पहाड़ी की ओर से आए तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया। तेंदुए के पंजे से चेलाराम के सिर पर गंभीर चोट लगी, जिससे वे लहूलुहान हो गए। उनकी चीख-पुकार सुनकर तेंदुआ वहां से भाग गया।
इसके कुछ ही देर बाद तेंदुआ गांव में घुसा और 58 वर्षीय लीलादेवी पत्नी वजाराम पर हमला कर दिया। वह अपने आंगन में घरेलू काम कर रही थी, तभी तेंदुआ घर में घुस आया और उन पर झपट पड़ा। तेंदुए ने उनके चेहरे, पैर और पीठ पर पंजे मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। उनकी चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे, जिससे तेंदुआ डरकर घर के एक कमरे में घुस गया और चारपाई के नीचे छिप गया।
गांव में अचानक तेंदुए के आने से हड़कंप मच गया। इसके बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने सतर्कता दिखाते हुए कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और वन विभाग को सूचना दी। गंभीर रूप से घायल चेलाराम और लीला देवी को आहोर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि लीला देवी को 16 टांके लगाने पड़े।
वन विभाग की सूचना पर जोधपुर से रेस्क्यू टीम बुलाई गई। दो कमांडो के साथ आई टीम ने दोपहर 1 बजे ऑपरेशन शुरू किया। पहले कमरे के गेट पर पिंजरा लगाया गया, लेकिन तेंदुआ बाहर नहीं निकला। तीन घंटे इंतजार के बाद टीम ने कमरे के सीमेंट शेड को तोड़ने का फैसला किया और शाम 5:20 बजे ट्रैंकुलाइजर गन से तेंदुए को बेहोश कर पिंजरे में डाल लिया गया। डीएफओ जयदेव सिंह चारण ने बताया कि तेंदुए को आहोर वन विभाग कार्यालय ले जाया गया, जहां मेडिकल जांच के बाद उसे जंगल में छोड़ने का निर्णय लिया जाएगा।
वन विभाग नाका प्रभारी संतोष राठौड़ के अनुसार 3 मार्च को भाद्राजून के बाला गांव में तेंदुए के पगमार्क मिले थे। वन विभाग ने उस समय तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया था, लेकिन वह नहीं पकड़ा गया। अब ग्रामीणों में डर का माहौल है और उन्होंने वन विभाग से इलाके में सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
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