राजस्थान के टोंक जिले के डिग्गी कस्बे में पुलिस ने मिलावटी दूध बनाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह कैमिकल और अन्य मिलावट करने वाले पदार्थों का इस्तेमाल कर दूध तैयार कर रहा था और टोंक, अजमेर से लेकर राजधानी जयपुर तक सप्लाई कर रहा था। स्वास्थ्य विभाग ने इस दूध को जानलेवा बताया है। जिला स्पेशल टीम (DST) ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह सोलंकी के नेतृत्व में छापेमारी कर इस गिरोह को पकड़ने में सफलता हासिल की। इस दौरान पुलिस ने 5,500 लीटर मिलावटी दूध, पांच पिकअप वाहन और एक दूध टैंकर जब्त किया है।
घातक रसायनों का उपयोग कर रहे थे आरोपी
जांच में सामने आया कि आरोपी दूध में घातक रसायनों का उपयोग कर रहे थे। दूध का रंग और बनावट बनाए रखने के लिए स्किम्ड मिल्क पाउडर, लैक्टोजा मोनोहाइड्रेट और कास्टिक सोडा मिलाया जा रहा था। दूध का फैट बढ़ाने के लिए डाल्डा घी, ताड़ का तेल और सोयाबीन तेल का प्रयोग किया जा रहा था।
मुख्य आरोपी फरार
पुलिस ने इस फैक्ट्री से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम हैं: राजू, कालू, महिपाल, शिवराज और ओमप्रकाश। इन आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे मिलावटी दूध को टोंक, अजमेर और जयपुर तक सप्लाई कर रहे थे। इस मिलावटी दूध फैक्ट्री का मुख्य संचालक बहरोड निवासी सोनू यादव फरार है। पुलिस उसकी जल्द गिरफ्तारी के प्रयास में है।
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'मुखबिर से मिली जानकारी के आधार पर हुई कार्रवाई'
मालपुरा के पुलिस उपाधीक्षक आशीष प्रजापत ने बताया कि छापेमारी के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे और सभी दूध के नमूने लिए गए हैं। जिला स्पेशल टीम की प्रभारी ओमप्रकाश चौधरी ने बताया कि मुखबिर से मिली जानकारी के आधार पर यह कार्रवाई की गई। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के खाद्य सुरक्षा अधिकारी मदन लाल गुर्जर ने कहा कि पहले भी इस फैक्ट्री के दूध के नमूने फेल हो चुके थे। इस बार लिए गए नमूनों की जांच के बाद आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाएगी।