राजस्थान लोक सेवा आयोग अजमेर के निर्देशों के तहत राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाएं संयुक्त प्रतियोगी (प्रारंभिक) परीक्षा-2024 टोंक जिले में निर्धारित 28 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। परीक्षा के लिए टोंक जिले में कुल 11,160 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से करीब 6,466 परीक्षार्थी शामिल हुए।
अतिरिक्त जिला कलेक्टर रामरतन सौंकरिया ने बताया कि जिले में आरएएस प्री परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गई। सभी परीक्षा केंद्रों पर वेब कैमरों के माध्यम से निगरानी की गई। वहीं, परीक्षा केंद्रों पर आने वाले सभी परीक्षार्थियों की वीडियोग्राफी करवाई गई। डमी कैंडिडेट की पहचान के लिए परीक्षार्थियों की बायोमेट्रिक प्रक्रिया भी पूरी की गई।
प्री परीक्षा के दौरान जिले में करीब 58% परीक्षार्थियों की उपस्थिति रही। कुल 11,153 में से 6,466 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी, जबकि 4,687 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। जिला कलेक्टर डॉ. सौम्या झा, एसपी विकास सांगवान और अतिरिक्त जिला कलेक्टर रामरतन सौंकरिया ने पूरी परीक्षा की मॉनिटरिंग की। इस दौरान अतिरिक्त जिला कलेक्टर रामरतन सौंकरिया ने सभी परीक्षा केंद्रों का दौरा कर व्यवस्थाओं की जांच की।
जिला मजिस्ट्रेट डॉ. सौम्या झा ने बताया कि संपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता, शुचिता एवं सुरक्षा को लेकर व्यक्तिगत रूप से मॉनिटरिंग की गई। परीक्षा केंद्र पर प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए केंद्राधीक्षक के अलावा अन्य किसी व्यक्ति, अधिकारी या अभ्यर्थी को मोबाइल लेकर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई। केंद्राधीक्षक को भी आयोग के निर्देशानुसार केवल कीपैड मोबाइल रखने की अनुमति थी।
जिला पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने बताया कि परीक्षा को निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनाने के लिए पुलिस व्यवस्था को समन्वित करने हेतु अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ब्रिजेंद्र सिंह भाटी को जिला स्तर पर पुलिस नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया। इस दौरान कानून और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर सीओ सिटी राजेश विद्यार्थी सहित तीन थानाधिकारी एवं लगभग 36 पुलिस निरीक्षकों सहित लगभग 250 पुलिस अधिकारियों और कार्मिकों को परीक्षा केंद्रों पर विशेष निगरानी एवं सुरक्षा के लिए तैनात किया गया।
बता दें कि परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग किए जाने पर राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2022 के तहत न्यूनतम 10 वर्ष का कारावास और न्यूनतम 10 लाख रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।