Hindi News
›
Video
›
Uttar Pradesh
›
Ayodhya News
›
VIDEO: क्षीरेश्वरनाथ महादेव मंदिर... जहां पूजन करने से राजा दशरथ को प्राप्त हुआ संतान सुख, चार पुत्रों के राजा बने
{"_id":"6a7878797d6f6b3b270a46bb","slug":"video-video-kashharashavaranatha-mahathava-mathara-jaha-pajana-karana-sa-raja-thasharatha-ka-parapata-haaa-satana-sakha-cara-patara-ka-raja-bna-2026-08-09","type":"video","status":"publish","title_hn":"VIDEO: क्षीरेश्वरनाथ महादेव मंदिर... जहां पूजन करने से राजा दशरथ को प्राप्त हुआ संतान सुख, चार पुत्रों के राजा बने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
VIDEO: क्षीरेश्वरनाथ महादेव मंदिर... जहां पूजन करने से राजा दशरथ को प्राप्त हुआ संतान सुख, चार पुत्रों के राजा बने
अयोध्या केवल राम मंदिर के लिए ही नहीं बल्कि अपने प्राचीन और चमत्कारी मंदिरों के लिए भी ख्याति प्राप्त है. यहां कई पौराणिक मंदिर और जगह हैं. इन्हीं पौराणिक मंदिरों में एक है क्षीरेश्वरनाथ महादेव मंदिर. इसके बारे में मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने पर संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती है. सावन के महीने में इस मंदिर में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है और दूर-दराज से दंपति भगवान शिव का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।
क्षीरेश्वरनाथ मंदिर का संबंध त्रेतायुग और राजा दशरथ से जुड़ा हुआ है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब अयोध्या के महाराज दशरथ संतान सुख से वंचित थे, तब उन्होंने भगवान शिव की आराधना के लिए इस स्थान पर आकर शिवलिंग का दूध से अभिषेक किया था. कहा जाता है कि उनके द्वारा चढ़ाया गया दूध इतना अधिक दिव्य था कि शिवलिंग से दूध की धारा प्रवाहित होने लगी. यह धारा आगे चलकर एक विशाल जलराशि में परिवर्तित हुई, जिसके कारण भगवान शिव यहां क्षीरेश्वरनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुए. ‘क्षीर’ का अर्थ दूध होता है, इसलिए इस मंदिर का नाम भी इसी घटना से जुड़ा माना जाता है.
पुजारी के अनुसार भगवान शिव की कृपा से राजा दशरथ की मनोकामना पूरी हुई. इसी की कृपा से बाद में उन्हें भगवान श्रीराम सहित चार पुत्रों की प्राप्ति हुई. तभी से यह मान्यता चली आ रही है कि जो दंपति संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर यहां श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करते हैं तथा भगवान शिव का दूध से अभिषेक करते हैं, उनकी मनोकामना भी पूरी होती है।
सावन, महाशिवरात्रि और श्रावण सोमवार के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजन और रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से इस मंदिर में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था बनी हुई है. अनेक परिवार अपनी मनोकामना पूर्ण होने के बाद पुनः यहां आकर भगवान का आभार व्यक्त करते हैं।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।