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With experience, technology and departmental support, progressive farmers of Kanda set an example of self-employment
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Bageshwar: अनुभव, तकनीक और विभागीय साथ, कांडा के प्रगतिशील किसानों ने पेश की स्वरोजगार की मिसाल
गायत्री जोशी
Updated Sat, 21 Feb 2026 04:56 PM IST
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बागेश्वर में पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और जंगली जानवरों की चुनौतियों को मात देकर कांडा क्षेत्र के किसान अब स्वरोजगार की नई पटकथा लिख रहे हैं। दीप पांडेय, माया जोशी और रेवाधर अंडोला जैसे प्रगतिशील किसानों की मेहनत और उद्यान विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से बंजर पड़े खेतों में मटर और गोभी की रिकॉर्ड पैदावार हो रही है। किसानों की इस सफलता के पीछे उद्यान सचल केंद्र, कांडा के प्रभारी कमल किशोर पंत का विशेष योगदान है। पंत समय-समय पर किसानों के खेतों का भ्रमण कर उन्हें आधुनिक बागवानी के गुर सिखा रहे हैं। कीट प्रबंधन से लेकर उन्नत बीजों के चयन तक, उनकी सलाह किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। विभागीय देखरेख के कारण ही फसलों की गुणवत्ता और उपज में सुधार देखने को मिला है। क्षेत्र के 77 वर्षीय बुजुर्ग किसान रेवाधर अंडोला आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। उनके दशकों पुराने अनुभव और दीप पांडेय के आधुनिक दृष्टिकोण के समन्वय ने जौलगांव, कोटगांव और जल्थाकोट क्षेत्रों में खेती का परिदृश्य बदल दिया है। दीप पांडेय का कहना है कि कमल किशोर पंत जैसे अधिकारियों के निरंतर सहयोग से अब खेती में जोखिम कम और लाभ की संभावनाएं बढ़ गई हैं। प्रगतिशील किसान माया प्रसाद जोशी बताते हैं कि जंगली जानवरों का खतरा एक बड़ी समस्या है, लेकिन बेहतर घेराबंदी और प्रबंधन से इसे कम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा, पहले फसल तैयार होने के बाद बाजार मिलना मुश्किल था, लेकिन अब हमें अच्छा बाजार मिलने लगा है, जिससे किसानों का उत्साह बढ़ा है। उद्यान विभाग और प्रगतिशील किसानों की यह जुगलबंदी क्षेत्र में पलायन रोकने की दिशा में प्रभावी कदम साबित हो रही है। बंजर खेतों में लहलहाती फसलें इस बात का प्रमाण हैं कि यदि सही मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध हो, तो पहाड़ की मिट्टी सोना उगल सकती है।
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