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दिन में 6-7 बार बिजली ट्रिप: गीडा में 30 फीसदी गिरा उत्पादन, 800 फैक्ट्रियां प्रभावित- लाखों का रोज नुकसान
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: Rohit Singh
Updated Mon, 25 May 2026 12:21 PM IST
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सार
गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में लगातार जारी बिजली ट्रिपिंग से 800 औद्योगिक इकाइयां प्रभावित हैं और उत्पादन में 30 फीसदी की गिरावट आई है। दिन में 6 से 7 बार ट्रिपिंग से मशीनें घंटों बंद रहती हैं। रोजाना लाखों का नुकसान हो रहा है। 20 हजार से अधिक उद्यमी-कर्मचारी भीषण गर्मी का संकट झेल रहे हैं।
गीडा में लगी फैक्टरी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
पश्चिमी युद्ध और डीजल किल्लत की छाया से उद्यमी अभी उबर नहीं पाए और अब बिजली ट्रिपिंग ने उत्पादन की रफ्तार पर असर डाला है। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में लगातार जारी बिजली ट्रिपिंग से 800 औद्योगिक इकाइयां प्रभावित हैं और उत्पादन में 30 फीसदी की गिरावट आई है।
कई इकाइयों में मशीनें घंटों बंद रहने से रोजाना लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। जिन उद्योगों में लगातार तापमान बनाए रखना जरूरी होता है, वहां स्थिति और गंभीर हो गई है। ग्लूकोज और आईवी फ्लूड बनाने वाली इकाइयों में ट्रिपिंग का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है।
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कई इकाइयों में मशीनें घंटों बंद रहने से रोजाना लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। जिन उद्योगों में लगातार तापमान बनाए रखना जरूरी होता है, वहां स्थिति और गंभीर हो गई है। ग्लूकोज और आईवी फ्लूड बनाने वाली इकाइयों में ट्रिपिंग का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है।
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गीडा में लगी फैक्टरी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उद्योगपतियों का कहना है कि इन प्लांटों में मशीनों को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया बेहद जटिल होती है। पूरी मशीन को खाली कर साफ करना पड़ता है। इसके बाद दो दिन तक उत्पादन प्रभावित रहता है। प्लास्टिक, गैस और हीट आधारित उद्योगों में भी भारी नुकसान की स्थिति बनी हुई है।
उद्योग संचालकों के मुताबिक, रात के समय आईवी फ्लूड यूनिटों पर लोड बढ़ने से ट्रिपिंग की समस्या और बढ़ जाती है। वहीं हैचरी यूनिटों को भी लगातार बिजली कटौती से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उद्योगों में काम करने वाले 20 हजार से अधिक उद्यमी-कर्मचारी रोजाना भीषण गर्मी का संकट झेल रहे हैं।
उद्योग संचालकों के मुताबिक, रात के समय आईवी फ्लूड यूनिटों पर लोड बढ़ने से ट्रिपिंग की समस्या और बढ़ जाती है। वहीं हैचरी यूनिटों को भी लगातार बिजली कटौती से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उद्योगों में काम करने वाले 20 हजार से अधिक उद्यमी-कर्मचारी रोजाना भीषण गर्मी का संकट झेल रहे हैं।
सुधांशु टिबड़ेवाल, निदेशक श्री सिद्धेश्वरी ग्रीनटेक प्राइवेट लिमिटेड
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक ट्रिपिंग में आठ हजार का नुकसान, उपकरणों की क्षमता पर असर
इकाई में पेपर से कप और प्लेट बनाने का काम होता है। एक बार ट्रिपिंग होने पर पूरा सामान खराब हो जाता है। एक ट्रिपिंग में सात से आठ हजार रुपये तक का नुकसान होता है। पूरी लाइन दोबारा चालू करने में दो से तीन घंटे लग जाते हैं। सर्वो और डीजी सेट लगाए गए हैं, इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। उपकरणों की क्षमता भी प्रभावित हो रही है: सुधांशु टिबड़ेवाल, निदेशक, श्री सिद्धेश्वरी ग्रीनटेक प्राइवेट लिमिटेड
इकाई में पेपर से कप और प्लेट बनाने का काम होता है। एक बार ट्रिपिंग होने पर पूरा सामान खराब हो जाता है। एक ट्रिपिंग में सात से आठ हजार रुपये तक का नुकसान होता है। पूरी लाइन दोबारा चालू करने में दो से तीन घंटे लग जाते हैं। सर्वो और डीजी सेट लगाए गए हैं, इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। उपकरणों की क्षमता भी प्रभावित हो रही है: सुधांशु टिबड़ेवाल, निदेशक, श्री सिद्धेश्वरी ग्रीनटेक प्राइवेट लिमिटेड
संदीप अग्रवाल, निदेशक, विजन पेरेंट्रल प्राइवेट लिमिटेड
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीजल संकट के साथ दो से तीन घंटे का ब्रेकडाउन
प्लांट में ग्लूकोज की बोतलें तैयार होती हैं जिनकी सप्लाई तुर्कमेनिस्तान, सोमालिया, नाइजीरिया समेत सरकारी क्षेत्र में की जाती है। प्लांट में दो से तीन घंटे का ब्रेकडाउन हो रहा है। उद्योग की जरूरत के मुताबिक डीजल नहीं मिल पा रहा है। हमें रोज करीब 250 लीटर डीजल चाहिए लेकिन पंपों पर तेल खत्म होने के कारण समय पर आपूर्ति नहीं हो पा रही है: संदीप अग्रवाल, निदेशक, विजन पेरेंट्रल प्राइवेट लिमिटेड
प्लांट में ग्लूकोज की बोतलें तैयार होती हैं जिनकी सप्लाई तुर्कमेनिस्तान, सोमालिया, नाइजीरिया समेत सरकारी क्षेत्र में की जाती है। प्लांट में दो से तीन घंटे का ब्रेकडाउन हो रहा है। उद्योग की जरूरत के मुताबिक डीजल नहीं मिल पा रहा है। हमें रोज करीब 250 लीटर डीजल चाहिए लेकिन पंपों पर तेल खत्म होने के कारण समय पर आपूर्ति नहीं हो पा रही है: संदीप अग्रवाल, निदेशक, विजन पेरेंट्रल प्राइवेट लिमिटेड
आरएन सिंह, अध्यक्ष, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गुणवत्ता पर असर, छोटे उद्योगों के सामने आर्थिक संकट
लगातार बिजली ट्रिपिंग से सबसे ज्यादा नुकसान हीट आधारित इकाइयों को हो रहा है। मशीनों का तापमान बार-बार गिरने से उत्पादन प्रक्रिया और तैयार माल की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो छोटे और मध्यम उद्योगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है: आरएन सिंह, अध्यक्ष, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज
लगातार बिजली ट्रिपिंग से सबसे ज्यादा नुकसान हीट आधारित इकाइयों को हो रहा है। मशीनों का तापमान बार-बार गिरने से उत्पादन प्रक्रिया और तैयार माल की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो छोटे और मध्यम उद्योगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है: आरएन सिंह, अध्यक्ष, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज
दीपक कारीवाल, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती गोरक्ष प्रांत
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लागत बढ़ रही, कच्चा माल पूरी तरह खराब हो जा रहा
उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। कई बार मशीनें अचानक बंद होने से कच्चा माल पूरी तरह खराब हो जाता है। कुछ दिनों पहले बिजली निगम को समस्या से अवगत कराया गया था। इसके बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ। समय पर समाधान नहीं हुआ तो निर्यात से जुड़े ऑर्डर प्रभावित होंगे। डीजल की कमी के कारण बैकअप व्यवस्था भी प्रभावी नहीं रह गई है: दीपक कारीवाल, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती गोरक्ष प्रांत
उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। कई बार मशीनें अचानक बंद होने से कच्चा माल पूरी तरह खराब हो जाता है। कुछ दिनों पहले बिजली निगम को समस्या से अवगत कराया गया था। इसके बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ। समय पर समाधान नहीं हुआ तो निर्यात से जुड़े ऑर्डर प्रभावित होंगे। डीजल की कमी के कारण बैकअप व्यवस्था भी प्रभावी नहीं रह गई है: दीपक कारीवाल, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती गोरक्ष प्रांत
बिजली की ट्रिपिंग अब काफी कम हो गई है। गीडा में नया बिजलीघर भी बन गया है। इसके बावजूद यदि समस्या आ रही है तो उसे दूर करने की कोशिश की जाएगी: आरके सिंह, अधिशासी अभियंता, सहजनवां