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पढ़ने-पढ़ाने की जिम्मेदारी: शिक्षिकाएं संवार रहीं कल की तस्वीर,बेटियों की आधे से ज्यादा हिस्सेदारी

Sat, 08 Aug 2026 12:55 PM IST
Rohit Singh रजनी ओझा, गोरखपुर
रजनी ओझा, गोरखपुर Published by: Rohit Singh Updated Sat, 08 Aug 2026 12:55 PM IST
सार

आंकड़ों के अनुसार जिले के प्राथमिक विद्यालयों में कुल 12,027 शिक्षक हैं जिनमें 6,954 महिला हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत कुल 2,702 शिक्षकों में 1,294 महिलाएं हैं। कंपोजिट विद्यालयों में कार्यरत कुल 11,832 शिक्षकों में 7,142 महिलाएं हैं। यह आंकड़ा कुल संख्या का करीब 60 फीसदी है। 

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In Gorakhpur, girls are dominating not only in education but also in teaching.
शिक्षा व्यवस्था। - फोटो : ANI

विस्तार

बोर्ड परीक्षा के नतीजों से विश्वविद्यालयों के स्वर्ण पदकों तक अपनी मेधा का परिचय देती आ रहीं बेटियों ने शिक्षा व्यवस्था में भी धमक कायम की है। मौजूदा समय में जिले में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में कार्यरत कुल 26,561 शिक्षकों में 15,390 महिलाएं शामिल हैं। जिम्मेदारी में आधे से ज्यादा की हिस्सेदारी के साथ आधी आबादी समाज और देश का भविष्य गढ़ने में जुटी है।
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संसद से लेकर अन्य संवैधानिक व्यवस्थाओं तक जहां आधी आबादी के लिए एक तिहाई स्थान सुरक्षित करने के लिए बहस जारी है वहीं गोरखपुर में शिक्षा के क्षेत्र में करीब 58 फीसदी महिलाएं कार्यरत हैं। यह संख्या न केवल शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की तस्दीक कर रही है बल्कि विद्यालयों में बच्चों, विशेषकर बच्चियों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील और प्रेरक वातावरण की राह भी आसान कर रही है।
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आंकड़ों के अनुसार जिले के प्राथमिक विद्यालयों में कुल 12,027 शिक्षक हैं जिनमें 6,954 महिला हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत कुल 2,702 शिक्षकों में 1,294 महिलाएं हैं। कंपोजिट विद्यालयों में महिलाओं की संख्या प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के मुकाबले ज्यादा है।
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कंपोजिट विद्यालयों में कार्यरत कुल 11,832 शिक्षकों में 7,142 महिलाएं हैं। यह आंकड़ा कुल संख्या का करीब 60 फीसदी है। शिक्षा के क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि विद्यालयों में महिला शिक्षकों की पर्याप्त संख्या होने से छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ता है।

किशोरावस्था से जुड़े विषयों पर खुलकर अपनी बात रख पाती हैं और विद्यालयों में उनकी उपस्थिति तथा पढ़ाई के प्रति रुचि भी बेहतर होती है। नई शिक्षा नीति के तहत गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा के लक्ष्य को हासिल करने में महिला शिक्षकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। महिला शिक्षकों की यह मजबूत भागीदारी बदलते सामाजिक परिदृश्य की तस्वीर भी पेश करती है।

शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों की धाक
इसी हफ्ते संपन्न हुए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और एमएमएमयूटी के दीक्षांत समारोह में बेटियों ने परचम लहराया। गोरखपुर विश्वविद्यालय के 45वें दीक्षांत समारोह में बेटियों की मेधा, उपलब्धि और कामयाबी का उत्सव देखने को मिला। समारोह में 85 मेधावी विद्यार्थियों को 172 पदक प्रदान किए गए जिसमें 63 छात्राएं शामिल रहीं। वहीं, एमएमएमयूटी में 20 गोल्ड मेडल में से 12 पर छात्राओं का कब्जा रहा।

In Gorakhpur, girls are dominating not only in education but also in teaching.
दीपेंद्र मोहन सिंह, समाजशास्त्र विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बोले शिक्षक
बेसिक शिक्षा में महिला शिक्षकों की अधिक संख्या केवल महिलाओं के रोजगार में वृद्धि नहीं है। यह ग्रामीण सामाजिक संरचना, लैंगिक भूमिकाओं और शिक्षा में हो रहे परिवर्तन का महत्वपूर्ण संकेत भी है। महिलाएं अब केवल घर तक सीमित नहीं हैं बल्कि शिक्षा और रोजगार के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में भी भूमिकाओं का निर्वहन कर रही हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं के लिए सकारात्मक उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही हैं। इससे भावी पीढ़ी में सामाजिक गतिशीलता की संभावनाएं बढ़ती हैं: डॉ. दीपेंद्र मोहन सिंह, समाजशास्त्र विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय

In Gorakhpur, girls are dominating not only in education but also in teaching.
डॉ अनुपम सिंह, शिक्षाशास्त्र विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बोले शिक्षक
प्राथमिक स्तर पर बच्चों की सीखने की क्षमता विकसित करने में महिला शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उनकी संवेदनशीलता, धैर्य और बच्चों के साथ सहज संवाद की क्षमता विद्यालयों के शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने में मदद करती है। यही वजह है कि अभिभावक भी छोटे बच्चों की शिक्षा के लिए महिला शिक्षकों को अधिक भरोसेमंद मानते हैं। ऐसे में महिला शिक्षकों की बढ़ती संख्या सुखद संकेत है। इससे शिक्षा व्यवस्था के ढांचे को संवारने में मदद मिलेगी: डॉ. अनुपम सिंह, शिक्षाशास्त्र विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय

In Gorakhpur, girls are dominating not only in education but also in teaching.
कल्पना सिंह, जिला उपाध्यक्ष, उप्र महिला शिक्षक संगठन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बोलीं शिक्षिका
अगर महिला शिक्षकों की तैनाती उनकी सुविधा के अनुसार की जाए तो उन्हें अपने क्षेत्र में बेहतर काम करने में आसानी होगी। साथ ही महिलाएं और ज्यादा रुचि से काम करेंगी। प्राथमिक स्तर की शिक्षा में बच्चों के मनोभाव को सही दिशा देने और पढ़ाई के प्रति प्रेरित करने में महिला शिक्षक बेहतर भूमिका निभा सकती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती संख्या सशक्तीकरण का भी संकेत देती है: कल्पना सिंह, जिला उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संगठन
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