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69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती: अभ्यर्थियों ने डिप्टी सीएम केशव मौर्य के आवास के बाहर किया प्रदर्शन, पुलिस ने रोका

अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Mon, 02 Feb 2026 12:15 PM IST
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सार

69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने डिप्टी सीएम केशव मौर्य के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। पुलिस ने उन्हें रोका और वापस ईको गार्डन भेज दिया। 

69,000 assistant teacher recruitment candidates protested outside Deputy CM Keshav Maurya residence
69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने किया प्रदर्शन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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यूपी में 69 हजार शिक्षक भर्ती में शामिल आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने सोमवार को लखनऊ में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई न होने से अभ्यर्थी नाराज हैं। इसी को लेकर अभ्यर्थी केशव मौर्य के घर के सामने धरने पर बैठे थे। उन्होंने जोरदार नारेबाजी की। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रही। अभ्यर्थी केशव चाचा न्याय करो का नारा लगाकर धरने पर बैठ गए। पुलिस ने सभी को बस से धरनास्थल इको गार्डेन भेज दिया। 

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अभ्यर्थियों का कहना है कि हाईकोर्ट का जो फैसला आया था, सरकार ने उसे जानबूझ कर लटका दिया। इससे मामला अब सुप्रीम कोर्ट में चला गया। सरकार के पास पर्याप्त समय था, वह हाईकोर्ट डबल बेंच के फैसले का पालन करके सबके साथ न्याय कर सकती थी।
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धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल व धनंजय गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2018 में यह भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। जब इसका परिणाम आया तो इसमें व्यापक स्तर पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया गया। उन्हें नौकरी देने से वंचित कर दिया गया। एक लंबे आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद बीते 13 अगस्त 2024 को लखनऊ हाईकोर्ट के डबल बेंच ने हम आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के हित में फैसला सुनाया। नियमों का पालन करते हुए अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिए जाने का आदेश दिया। लेकिन, सरकार इस प्रकरण में हीलाहवाली करती रही। 

पटेल ने कहा कि उन्होंने इससे पहले भी कई बार केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया था। तब उन्होंने त्वरित न्याय किए जाने की बात कही थी। हम अभ्यर्थियों से मुलाकात भी की थी। लेकिन, उनकी बात को भी अधिकारियों ने नहीं माना। अब यह मामला माननीय सुप्रीम कोर्ट में चला गया। हम पिछड़े दलित गरीब अभ्यर्थी अधिकारियों और सरकार के इस रवैया से काफी हताश और परेशान हैं। जो काम कुछ दिनों में हो सकता था, उसे इतना लंबा जानबूझकर टाल दिया गया है। केशव का त्वरित न्याय की टिप्पणी, खाने के दांत अलग और दिखाने के दांत अलग साबित हुआ। त्वरित न्याय की कोई सीमा होती है यह नहीं की महीनों मामला लटक रहे।

आंदोलन में विक्रम यादव, अमित मौर्या, अनिल, धंनंजय, अनिल कुमार, मो. इरशाद, राहुल मौर्या, उमाकांत मौर्या, शिव मौर्या, अर्चना मौर्या, कल्पना, शशि पटेल आदि अभ्यर्थी शामिल थे।

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