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UP News: जिला पंचायतों की आर्थिक सेहत होगी और मजबूत, अतिरिक्त स्टांप शुल्क में मिलेगा हिस्सा

अजित बिसारिया, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Wed, 03 Jun 2026 08:09 AM IST
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सार

यूपी में जिला पंचायतों की आर्थिक सेहत अब और मजबूत होगी। अब अतिरिक्त स्टांप शुल्क में भी हिस्सा मिलेगा। बता दें, रजिस्ट्री के समय विकास के लिए 2% अतिरिक्त स्टांप शुल्क लिया जाता है। आगे पढ़ें पूरी खबर...

financial health of District Panchayats in UP is set to strengthen
स्टांप शुल्क। (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

उत्तर प्रदेश सरकार जिला पंचायतों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाने जा रही है। इसके तहत उनके अधीन सीमाओं को स्पष्ट किया जाएगा। साथ ही दो प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप शुल्क में जिला पंचायतों को भी हिस्सा मिलेगा। इसके अलावा नक्शे पास करने में सीमा विवाद को खत्म करने के लिए विकास प्राधिकरणों के बोडों में बतौर सदस्य जिला पंचायतों के अपर मुख्य अधिकारी (एएमए) भी शामिल किए जाएंगे।



उच्चस्तर पर तय हुआ है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्राधिकरण जो अम्बार शुल्क ले रहे हैं, उसे जिला पंचायतों को हस्तांतरित करने और दो प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप शुल्क का एक अंश जिला पंचायतों को देने के लिए संबंधित अधिनियमों में संशोधन किए जाएंगे। अभी तक यह अतिरिक्त स्टांप शुल्क संबंधित नगर निगम और विकास प्राधिकरण को मिलता है। 
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विकास प्राधिकरणों को प्राप्त होने वाले विकास शुल्क के उपयोग के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित अवस्थापना विकास निधि समिति में एएमए, जिला पंचायत को सदस्य बनाया जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह नई उपविधि ग्रामीण उत्तर प्रदेश में नियोजित, सुरक्षित और सतत विकास की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है।

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जिला पंचायतों की सीमा होगी स्पष्ट, आसानी से पास होंगे नक्शे

शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में सुनियोजित विकास के लिए उच्च शक्ति प्राप्त समिति का गठन किया था, जिसने अपनी रिपोर्ट शासन को दे दी है। इसमें विकास प्राधिकरणों और जिला पंचायतों के मध्य क्षेत्राधिकार संबंधी विवादों के समाधान के लिए ग्राम्य क्षेत्र की परिभाषा को पूरी तरह से स्पष्ट किया गया है।


प्राधिकरणों के अधिसूचित क्षेत्र, विनियमित क्षेत्र, विशेष क्षेत्र, औद्योगिक विकास क्षेत्र और आवास विकास के अधिसूचित क्षेत्र को ग्राम्य क्षेत्र की परिभाषा से बाहर कर दिया गया है। जिला पंचायतों के लिए भी विकास प्राधिकरणों की भवन उपविधियों के आधार पर ही यह नई मॉडल उपविधि प्रस्तावित की गई है।

5 हेक्टेयर से बड़े ले-आउट के लिए प्रदेश स्तर पर तकनीकी सेल 

ग्रामीण क्षेत्रों में 15 मीटर से ऊंचे भवनों और 5 हेक्टेयर से बड़े ले-आउट में उच्चस्तर से अनुमोदन के लिए प्रदेश स्तर पर तकनीकी सेल का गठन प्रस्तावित किया गया है।

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