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UP: 3200 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी में 16 हजार करोड़ के स्क्रैप का खेल, 15 अधिकारियों की मिलीभगत का संदेह

अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Fri, 26 Jun 2026 09:49 AM IST
सार

कानपुर का स्क्रैप-जीएसटी सिंडिकेट मामले में 15 अधिकारियों की मिलीभगत का संदेह है। इसका पूरा रैकेट प्रदेश भर में फैला हुआ है। 35 हजार करोड़ रुपये तक की चोरी में सफेदपोश भी शामिल हैं।

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UP: ₹16,000 crore scrap racket behind ₹3,200 crore GST evasion.
यूपी में बड़ी जीएसटी चोरी - फोटो : सांकेतिक

विस्तार

कानपुर में सामने आए 3,200 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) तक पहुंचने के बाद राज्य कर विभाग में खलबली मची हुई है। शुरुआती निष्कर्ष संकेत दे रहे हैं कि मामला केवल फर्जी फर्मों और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की हेराफेरी तक सीमित नहीं है बल्कि स्क्रैप कारोबार, फर्जी बिलिंग, हवाला और बेनामी कंपनियों के जरिये हजारों करोड़ रुपये के लेनदेन का नेटवर्क सक्रिय था। विभागीय सूत्रों के मुताबिक 3200 करोड़ की जीएसटी चोरी में 16 हजार करोड़ के स्क्रैप का हेरफेर किया गया है। ये रकम 35 हजार करोड़ और 7000 करोड़ की टैक्स चोरी तक पहुंच सकती है। कम से कम 15 अधिकारी जांच के घेरे में हैं।

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सूत्रों के अनुसार अभी जिस 3,200 करोड़ रुपये के मामले की जांच चल रही है, वह पूरे नेटवर्क का केवल एक हिस्सा है। जांच एजेंसियों को स्क्रैप और अन्य कारोबारों से जुड़ी कई ऐसी कंपनियों के सुराग मिले हैं, जिनके जरिये बड़े पैमाने पर संदिग्ध खरीद-बिक्री और फर्जी आईटीसी का खेल चलाया गया। पुलिस और कर विभाग पहले ही 128 कंपनियों को नोटिस जारी कर चुके हैं, जिनमें से 54 स्क्रैप कारोबार से जुड़ी हैं।
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पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड के रूप में मेहफूज अली को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसके नेटवर्क ने फर्जी दस्तावेजों और शेल कंपनियों के जरिये करोड़ों रुपये के लेनदेन को अंजाम दिया। कई कंपनियां ड्राइवरों, गरीबों और परिचितों के नाम पर खोली गई थीं जबकि वास्तविक संचालन कोई और कर रहा था। रडार पर कुछ जीएसटी प्रैक्टिशनर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, अधिवक्ता और इस्पात कारोबारी भी हैं।


विभागीय सूत्रों का दावा है कि जांच केवल कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगी। कई अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। राज्य कर विभाग की कार्रवाई में पहले भी कानपुर में सैकड़ों फर्जी फर्मों का खुलासा हुआ था। फरवरी 2026 में 425 संदिग्ध फर्मों पर कार्रवाई करते हुए विभाग ने पाया था कि अधिकांश फर्में कागजों पर संचालित हो रही थीं और स्क्रैप, लोहा-स्टील कारोबार के नाम पर फर्जी बिल जारी कर आईटीसी का लाभ लिया जा रहा था।

लूट की घटना से खुला हजारों करोड़ रुपये का नेटवर्क
पूरे मामले का खुलासा कानपुर के चकेरी क्षेत्र में हुई 24 लाख रुपये की लूट की जांच के दौरान हुआ। पुलिस को जांच में फर्जी कंपनियों, बैंक खातों और संदिग्ध लेनदेन का ऐसा नेटवर्क मिला, जिसकी वित्तीय परतें 3,200 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचती दिखीं। इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू कर दी और पुलिस व जीएसटी विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

बनेगा देश का सबसे बड़ा स्क्रैप-जीएसटी घोटाला
विभागीय सूत्रों का कहना है कि संदिग्ध लेनदेन की सभी परतें खुलीं तो यह मामला देश के सबसे बड़े स्क्रैप आधारित जीएसटी घोटालों में शामिल हो सकता है। हालांकि 16 हजार करोड़ रुपये के स्क्रैप कारोबार और 7 हजार करोड़ रुपये तक की संभावित कर चोरी की परतें खुलेंगी। एजेंसियां बैंकिंग ट्रेल, जीएसटी रिकॉर्ड, ई वे बिल और शेल कंपनियों के नेटवर्क की फोरेंसिक जांच कर रही हैं।

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