विधानसभा चुनाव के छठवें चरण के तहत, बृहस्पतिवार को जिले में 56.82 फीसदी मतदान हुआ। यह साल 2017 के चुनाव से 1.38 फीसदी अधिक है। माना जा रहा है कि फाइनल टेबुलेशन में मतों का प्रतिशत अभी और बढ़ेगा। पिपराइच, सहजनवां और ग्रामीण क्षेत्र के मतदाता वोट करने में आगे रहे। पिपराइच में सबसे अधिक 63.26 फीसदी वोटिंग हुई, तो सहजनवां में 61.04 फीसदी। गोरखपुर ग्रामीण में 60.11 फीसदी मतदाताओं ने मताधिकार का इस्तेमाल किया। बांसगांव और खजनी में मतदान कम हुआ है। बांसगांव में 50.20 फीसदी तो खजनी में 52.65 फीसदी मत पड़े। हालांकि, शहर के लोगों ने इस बार ज्यादा जागरूकता दिखाई। यहां 55.12 फीसदी वोटिंग हुई, जो पिछले चुनाव की तुलना में चार फीसदी अधिक है। 2017 के विधानसभा चुनाव में यहां 51.01 फीसदी मत पड़े थे।
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बीते एक दशक में हुए विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तुलना में यह चुनाव सर्वाधिक शांतिपूर्ण रहा। मारपीट तो दूर, कहीं नोकझोंक की भी घटना नहीं हुई। पुलिस और प्रशासन के साथ ही अर्द्धसैनिक बल के जवान सभी बूथों पर मुस्तैद रहे। करीब 20 बूथों पर ईवीएम खराब हुए, हालांकि इनसे कहीं पर भी 1.15 घंटे से अधिक देर तक मतदान प्रभावित नहीं हुआ। इस दौरान संबंधित बूथों के ईवीएम दुरुस्त कर लिए गए या फिर बदल दिए गए। अलबत्ता कई मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कट जाने का मामला जरूर सामने आया।
गोरखपुर जिले के सभी वल्नरेबल और क्रिटिकल समेत 60 फीसदी यानी 2,513 बूथों की वेबकास्टिंग कराई गई। इसके जरिए कलेक्ट्रेट स्थित कंट्रोल रूम से ही इन बूथों की सभी गतिविधियों पर निरंतर निगरानी होती रही। मतदान पूरे होने और फिर ईवीएम जमा करने के समय तक कमिश्नर रवि कुमार एनजी, डीआईजी जे. रविंद्र, जिला निर्वाचन अधिकारी विजय किरन आनंद, एसएसपी डॉ. विपिन ताडा समेत सभी प्रशासनिक व पुलिस के अफसर मुस्तैद रहते हुए निरंतर क्षेत्र का भ्रमण करते रहे।
मुख्यमंत्री योगी समेत 109 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद
बृहस्पतिवार को छठवें चरण के लिए मतदान समाप्त होने के साथ ही मुख्यमंत्री व गोरखपुर शहर सीट से प्रत्याशी योगी आदित्यनाथ समेत नौ विधानसभा क्षेत्रों के 109 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई। इनमें कैंपियरगंज से 13, पिपराइच से 14, शहर से 13, ग्रामीण से सर्वाधिक 15, सहजनवां से 13, खजनी से 10, बांसगांव से नौ, चौरीचौरा से 13 और चिल्लूपार से नौ प्रत्याशी शामिल हैं।
पिछली बार की तुलना में इस बार ईवीएम ने भी कम दगा दिया
इस बार जहां पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में चुनाव संपन्न हुआ, वहीं ईवीएम ने भी कम ही दगा दिया। पिछले विधानसभा चुनाव 2017 और लोकसभा चुनाव 2019 में 70 से अधिक बूथों पर ईवीएम खराब हुई थी, मगर इस बार करीब 20 बूथों पर ही ईवीएम खराब हुई। इनमें भी ज्यादातर में खराबी की सूचना सुबह मतदान शुरू होने के समय ही मिली। ईवीएम के जानकारों के मुताबिक, ठीक से प्रशिक्षण नहीं प्राप्त कर पाने की वजह से कुछ बूथों पर पोलिंग पार्टियां ईवीएम सेट नहीं कर पाती हैं। ऐसे में उन्हें खराब हो जाने का भ्रम हो जाता है।